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Punjab Twin Bombings: पंजाब में हिंसाचार के बाद राघव चड्ढा ने CM भगवंत मान से पूछा कि ISI को क्लीन चिट क्यों दिया गया?

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अमृतसर और जालंधर में बम धमाकों के बाद आईएसआई की भूमिका की जांच की मांग की गई हैं। उन्हें मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने और पाकिस्तान की एजेंसी ISI को ‘क्लीन चिट’ देने का आरोप लगाया गया था।

न्यू दिल्ली: राज्य की राजनीति जालंधर और अमृतसर में बम धमाकों के बाद गर्म हो गई है। इन घटनाओं को लेकर पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कड़ा हमला बोला। उन्हें लगता है कि पंजाब में शांति और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश है और इसकी गम्भीरता को समझना चाहिए।

ISI का भूमिका के दावा को जानें क्या

पंजाब के डीजीपी राघव चड्ढा ने फॉरेंसिक जांच और घटनास्थल के निरीक्षण के बाद प्रारंभिक जांच में ISI की भूमिका की आशंका व्यक्त की है। उन्हें लगता है कि यह हमला पंजाब को भयभीत करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए।

पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान पर साथा निशाना

चड्ढा ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस पूरे मामले में पाकिस्तान की आईएसआई (ISI) को ‘क्लीन चिट’ देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि मुख्यमंत्री का बीजेपी से विरोध इतना बढ़ गया है कि वे हर घटना में बीजेपी का हाथ देखते हैं। चड्ढा ने पूछा कि मुख्यमंत्री सीधे पाकिस्तानी संस्थाओं पर आरोप लगाने से बच रहे हैं क्यों?

ISI का नैरेटिव दोहराया जाता है

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि ISI अक्सर किसी आतंकी घटना में शामिल होकर उसे बाद में ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ कहकर खुद को अलग करने की कोशिश करती है। उनका आरोप है कि भगवंत मान भी ISI की भाषा बोलते हैं। चड्ढा ने कहा कि ऐसे बयान राज्य की सुरक्षा और जांच एजेंसियों को कमजोर कर सकते हैं, जो बहुत खतरनाक है।

कानून-व्यवस्था पर उठाए गए प्रश्न

उनका कहना था कि पंजाब पहले भी आतंकवाद और हिंसा का सामना कर चुका है, इसलिए ऐसी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता। चड्ढा ने राज्य सरकार से मांग की कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से दूर होकर जांच को निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों के बीच भरोसा बनाए रखना चाहिए।

जनता के भरोसे को जीतने कि अपील

राघव चड्ढा ने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे “गैर-जिम्मेदाराना बयान” देने के बजाय राज्य की सुरक्षा और शांति को पुनःस्थापित करने पर ध्यान दें। उनका कहना था कि पंजाब के लोग सच्चाई जानना चाहते हैं और सरकार को पारदर्शिता से जांच करनी चाहिए। लोगों को भरोसे में लेने के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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