बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हराया। TMC ने 81 सीटों पर जीत हासिल की, जिसमें बस बंगाल के पांच रीजन में से दो में काफी मदद मिली। तृणमूल कांग्रेस ने चिकन नेक और ग्रेटर कोलकाता रीजन में कम जीत हासिल की, हालांकि बीजेपी से अधिक। टीएमसी ने उत्तर बंगाल में बर्धमान, जंगलमहल-मेदिनीपुर और बर्धमान में सिर्फ कुछ सीटें जीतीं।
कोलकाता: 1977 से 2025 के बीच देश के अन्य राज्यों में कितने मुख्यमंत्री बदल गए, लेकिन 9 मई को पश्चिम बंगाल को अब चौथा मुख्यमंत्री मिलेगा। 15 साल बाद, भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में 206 सीट जीतकर टीएमसी को सत्ता से बाहर कर दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 39.1 प्रतिशत वोट प्राप्त किए, जबकि टीएमसी ने 46.2 प्रतिशत वोट प्राप्त किए। इस आंकड़े से ऐसे संकेत मिले थे कि बीजेपी बंगाल विधानसभा चुनाव में 105 सीटों तक गिर सकती है और ममता बनर्जी की सरकार को गिरा नहीं सकता। 4 मई के नतीजों के अनुसार, राज्य के पांच रीजन में से तीन में TMC लगभग नष्ट हो गया था। 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का स्ट्राइक रेट 70.4 प्रतिशत रहा, जबकि टीएमसी का स्ट्राइक रेट 26 प्रतिशत हो गया. 290 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी का स्ट्राइक रेट 26 प्रतिशत था।

चुनाव के विशिष्ट पहलुओं को समझें
1.बीजेपी के आनंदमय बर्मन माटिगारा-नक्सलबाड़ी में 1,04,265 वोटों से विजयी हुए। आनंदमय ने सर्वाधिक वोटों से जीत हासिल की
2.तृणमूल कांग्रेस के तापस चटर्जी ने सिर्फ 323 वोटों से राजरहाट न्यू टाउन में जीत हासिल की। वह सबसे कम वोटों से जीता।
3.बीजेपी के अनुसार, मुर्मू सबसे युवा विधायक हैं। वह मान बाजार से जीती हैं और सिर्फ 27 साल की हैं।
4.TMC के समर मुखर्जी विधानसभा में सबसे बड़ा विधायक होगा। रतुआ में रहते हैं, उनकी उम्र 84 वर्ष है।
5.बीजेपी के सबसे अमीर विधायक दिलीप साहा हैं, हलफनामे में, नाबाग्राम से विजेता दिलीप साहा ने बताया कि उनकी संपत्ति ४३ करोड़ रुपये है।
कैश का जो स्कीम लगाया गया, वो हो गया फैल जानें
अप्रैल 2026 में बंगाल की हवा इतनी बदल गई कि 4 मई को पूरे राज्य में हरा गुलाल की जगह केसरिया अबीर उड़ने लगा। ममता सरकार के २३ मंत्री चुनाव हार गए। टीएमसी ने अचानक बर्धमान, ग्रेटर कोलकाता और जंगल महल मेदिनीपुर जिलों के अलावा चिकन नेक नामक जिलों को खो दिया। बीजेपी और चुनाव प्रबंधन ने पिछले पांच वर्षों में ऐसा प्रभाव डाला कि ममता बनर्जी की कैश बांटने वाली योजना असफल हो गई। 2024 तक, भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर बंगाल में टीएमसी को पांच क्षेत्रों में हराया। बीजेपी की लहर के दौरान भी तृणमूल कांग्रेस को 108 में से 46 सीटें मिलीं, जो ग्रेटर कोलकाता में ही रही।
उत्तर बंगाल पूरी तरह से भगवानमय है
TMC को बर्धमान, ग्रेटर कोलकाता और जंगल महल-मेदिनीपुर में 2026 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। बीजेपी को टीएमसी का नुकसान मिला। बीजेपी को 2021 के चुनाव में नॉर्थ बंगाल की 27 सीटों में से 21 मिली। दूसरे दलों को एक सीट दी गई थी। तृणमूल कांग्रेस के उत्तर बंगाल से चुने गए सिर्फ पांच विधायक थे। बीजेपी ने इसके बाद ही आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने उत्तर बंगाल को अनदेखा किया है। बीजेपी ने 2026 के चुनाव में उत्तर बंगाल में टीएमसी को हराया। बीजेपी ने इस बार 26 सीटें जीती, टीएमसी को 27 में से सिर्फ एक मिली।
| नॉर्थ बंगाल | कुल सीट – 27 | ||||
| 2026 | टीएमसी – 1 | बीजेपी –26 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य-0 |
| 2021 | टीएमसी – 5 | बीजेपी –21 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य- |
टीएमसी ने चिकनी नेक में साख को बचाया
पश्चिम बंगाल, भारत के नक्शे पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है, 49 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुआ। बीजेपी और टीएमसी ने 22–22 सीटें जीतीं। कांग्रेस को भी पांच वर्ष बाद दो सीटें इसी क्षेत्र से मिली। वास्तव में, आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी ने चिकन नेक में 2011 के मुकाबले 11 ज्यादा सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी ने 16 सीटें खो दीं।
| चिकन नेक | कुल सीट – 49 | ||||
| 2026 | टीएमसी – 22 | बीजेपी –22 | कांग्रेस-2 | वाम दल- 1 | अन्य-2 |
| 2021 | टीएमसी – 38 | बीजेपी –11 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य-0 |
बर्धमान में खेल पलट गई जानें
इस बार भी बर्धमान में खेल पूरी तरह से बदल गया। TMC ने 2021 के चुनाव में बर्धमान क्षेत्र में 54 में से 46 सीटें जीतीं। बीजेपी को आठ सीटें मिली। इस बार नतीजा बदल गया। बीजेपी ने 45 सीटें प्राप्त की हैं, जबकि टीएमसी ने 9 सीटें प्राप्त की हैं। फिर से, वाम दल और कांग्रेस को बर्धमान में कुछ भी नहीं मिला।
| बर्धमान | कुल सीट – 54 | ||||
| 2026 | टीएमसी – 9 | बीजेपी –45 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य-0 |
| 2021 | टीएमसी – 46 | बीजेपी –8 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य-0 |
बीजेपी ने ग्रेटर कोलकाता में हमला किया
तृणमूल कांग्रेस ने ग्रेटर कोलकाता की 108 सीटों पर एकछत्र राज्य बनाया, इसलिए बंगाल चुनाव के दूसरे चरण को कड़ा माना जा रहा था। 2021 में TMC ने सिर्फ ग्रेटर कोलकाता से 93 सीटें जीतीं। बीजेपी ने चौबीस सीट जीतीं। भाजपा ने इस चुनाव में 60 सीटें जीतीं। रिपोर्ट्स कहते हैं कि बीस साल पहले, ग्रेटर कोलकाता वामपंथियों की राजधानी था। 2026 के चुनाव में बीजेपी का साथ भी वामपंथी समर्थकों ने दिया। ग्रेटर कोलकाता में बीजेपी ने 60 सीटें और टीएमसी ने 46 जीतीं। वाम दल ने भी इसी क्षेत्र से एक सीट जीतकर विधानसभा में वापसी की।
| ग्रेटर कोलकाता | कुल सीट – 108 | ||||
| 2026 | टीएमसी –46 | बीजेपी –60 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 1 | अन्य-0 |
| 2021 | टीएमसी – 93 | बीजेपी –14 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य |
बीजेपी भी जंगल में फैल गया
मेदिनीपुर के जंगल महल में बीजेपी ने टीएमसी को बुरी तरह पीटा। 2021 के चुनाव में ही बीजेपी ने जंगल महल मेदिनीपुर में 23 सीट जीतकर मजबूती दिखाई दी थी। टीएमसी ने 33 सीट जीतकर दबदबा बनाए रखा था। यह नॉर्थ बंगाल और बर्धमान के बाद तीसरी जगह था जहां टीएमसी ध्वस्त हो गई। 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 54 सीटें मिलीं, जबकि टीएमसी को सिर्फ 2 मिलीं। टीएमसी ने चिकन नेक रीजन की 22 सीटें और ग्रेटर कोलकाता की 46 सीटें नहीं जीती होती तो पराजय का स्तर कुछ अलग होता।
| जंगल महल-मेदिनीपुर | कुल सीट – 56 | ||||
| 2026 | टीएमसी – 2 | बीजेपी –54 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य-0 |
| 2021 | टीएमसी – 33 | बीजेपी –23 | कांग्रेस-0 | वाम दल- 0 | अन्य-0 |
मतों में बहुत अंतर नहीं
Experts मानते हैं कि TMC anti-imbecility का शिकार हुआ है, लेकिन अभी तक इसका जनाधार अस्तित्व में है। जबकि दोनों दलों के वोटों में सिर्फ पांच प्रतिशत का अंतर है, बीजेपी ने सात प्रतिशत वोट बढ़ाकर बड़ी जीत हासिल की है। बीजेपी ने चुनाव में 45.9 प्रतिशत वोट पाए, जबकि टीएमसी ने 40.8 प्रतिशत वोट पाए। बीजेपी की सरकार 2031 तक रहेगी, लेकिन बंगाल की स्थिति को बदलने में नाकामयाब रही तो 2029 में टीएमसी को इस अंतर को समाप्त करना आसान होगा।