इस बार ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बन गई है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने अपनी हार का बदला लिया। बीजेपी ने ममता बनर्जी को ऐसा बदला दिया है कि वे कभी नहीं भूल पाएंगे। ममता बनर्जी ने इतनी कम सीटें उम्मीद नहीं की थीं।
कोलकाता: आज, यानी 4 मई को, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनावों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। 5 राज्यों में से 5 में बीजेपी-टीएमसी की लड़ाई के कारण बंगाल सबसे अधिक चर्चा में है। साथ ही ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर लिया है। अमित शाह भी बंगाल में थे। वहीं योगी आदित्यनाथ ने व्यापक जनसभाएं और रैलीएं कीं। बंगाल में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत जीता है। ममता बनर्जी की सरकार को इस बार बंगालियों ने गिरा दिया। ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल की सरकार इस बार गिर गई, हालांकि उन्होंने लगातार तीन बार जीत हासिल की थी। ममता बनर्जी की पराजय के पीछे पांच बड़े कारण रहे हैं। क्या आप जानते हैं?

SIR का बंगाल चुनाव पर प्रभाव
बंगाल में चुनाव आयोग ने SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान शुरू किया। इसके बाद ऐसे मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया। जो या तो दो जगह अपने नाम दर्ज कराया था या वह यहाँ का मतदाता नहीं था। इसके अलावा, मर चुके मतदाताओं के नाम भी हटाए गए। ममता बनर्जी इसका बहुत विरोध करती थीं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की। हालाँकि, उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
SIR ने बंगाल में 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काटे। SIR के दौरान बांग्लादेशी लोग अपने घर चले गए। भारत-बांग्लादेश सीमा पर बहुत से लोग अपने देश लौट रहे थे, यानी बांग्लादेश। यह भी कहा गया कि वह लोग यहाँ रोजी-रोजी के लिए आए और फिर धीरे-धीरे राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवा लिए। बाद में वह यहां मतदाता था। लेकिन अब उनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, जो उनकी नागरिकता को साबित कर सकें।
हिंदू वोटबैंक का बंगाल चुनाव में हुआ ध्रुवीकरण को जानें
ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करने में इस बार हिंदू मतदाताओं का बीजेपी की ओर झुकाव भी महत्वपूर्ण था। पिछले चुनाव में बीजेपी ने चुनाव जीता था, लेकिन ममता बनर्जी ने जीत हासिल की थी। इसके बाद वह मुख्यमंत्री बन गईं। TMC के सत्ता में आने के बाद उनके कार्यकर्ताओं ने हिंदू बहन-बेटियों के साथ किस तरह से दुर्व्यवहार किया था हिंदू लोग भयभीत थे। हिंदू को सिर्फ अपनी बहनों की चिंता सताने लगी। ममता बनर्जी ने इन सब को रोक नहीं पाया, जिससे हिंदू वोटर बीजेपी को वोट दिया। “सोनार बांग्ला” और “खेला होबे 2026” के नारा हिंदुत्व को प्रमुखता से उठाया।
मुस्लिमों के प्रति ममता बनर्जी का स्नेह
ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल चुनाव में हार का सबसे बड़ा कारण उनका मुस्लिमों के प्रति अंधभक्ति था। उनके हर कार्यक्रम और भाषण में मुसलमानों के प्रति स्नेह दिखाया। जो बंगाल में हिंदुओं के प्रति ममता बनर्जी की अलग छवि पैदा कर दी। बीजेपी का समर्थन करने के लिए बंगाल में रहने वाले हिंदू लोगों ने पिछले पांच सालों में झेले गए अपमानों से बचने का फैसला किया। लेकिन बंगाल के हिंदू साइलेंट रहे और साइलेंट ही बीजेपी को वोट दिया। उन्हें टीएमसी के कार्यकर्ताओं की हिंसा का सामना करना पड़ता है, इसलिए उन्हें बीजेपी के साथ होने का आरोप नहीं लगाना चाहिए। हिन्दुओं पर मुस्लिमों द्वारा अत्याचार की कई खबरें सामने आईं, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया।
2025 में बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में हिंदू लोगों पर हिंसा हुई। अप्रैल 2025 में हिंदू पीड़ितों से राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मुलाकात की। उन्हें ममता बनर्जी सरकार से घेरना पड़ा, लेकिन उनके मुस्लिम प्रेम के आरोपों पर कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए इसने 2026 के चुनाव पर प्रभाव डाला।
भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ-साथ ‘एंटी-इनकंबेंसी’
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों, जैसे राशन घोटाला और भर्ती घोटाला, ने ममता बनर्जी सरकार को जनता में नाराज कर दिया। जमीनी स्तर पर, लोग बदलाव के पक्ष में दिखे। बंगाल का राशन घोटाला एक बड़ा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाला है, जिसमें गरीबों को सरकारी राशन अवैध रूप से खुले बाजार में बेचा जाता है। इस घोटाले में 9000 से 10,000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का शक है। यह भी भर्ती घोटाला था। हाल के वर्षों में सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक बंगाल का भर्ती घोटाला है, विशेष रूप से शिक्षक भर्ती घोटाला।इसमें 2016 की भर्ती प्रक्रिया में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति के बदले भारी रिश्वतखोरी और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। बंगाल में ममता बनर्जी सरकार को ‘एंटी-इनकंबेंसी’ माना जाता है।
संगठनात्मक में हुआ कमजोरी और अंतर्कलह
पिछली बार की तरह, टीएमसी में कुछ भी अच्छा नहीं रहा। पार्टी में अविश्वास फैल गया। जो ममता बनर्जी ने नियंत्रित नहीं किया। बीजेपी में कई टीएमसी नेता और कार्यकर्ता शामिल हो गए। इन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बीजेपी को पिछले विधानसभा चुनाव में हराया था। ये भी ममता बनर्जी की पराजय का एक महत्वपूर्ण कारण रहा है।