2026 की Bihar Legislative Council चुनावभाजपा के सूर्य कुमार शर्मा, जिन्हें अरविंद शर्मा भी कहा जाता है, ने बिहार विधान परिषद चुनाव में नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित पार्टी के सभी नेता उनके नामांकन में उपस्थित थे। पार्टी में एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में अरविंद शर्मा जाना जाता है।
पटना: सूर्य कुमार शर्मा (अब अरविंद शर्मा) का नामांकन, जिसमें कई प्रमुख नेताओं के ‘V’ हस्ताक्षर हैं, बताता है कि बीजेपी की आत्मा कार्यकर्ताओं में है। यह संकेत था कि सूर्य कुमार शर्मा निर्विरोध विजेता हैं। लेकिन उनकी प्रत्याशी के रूप में घोषित और नामांकित होने के बाद भी सूर्य कुमार शर्मा, जो अरविंद शर्मा का चेहरा बन गया, आज भी उत्तर चाहता है। वह सूर्य कुमार शर्मा बन गया और अरविंद शर्मा ही रह गया।

सूर्य कुमार शर्मा को कोई नहीं जानता था अगर एमएलसी पद के लिए नामांकन का मुद्दा सामने नहीं आया होता। चलिए जानते हैं उस दिलचस्प कहानी को जहां से अरविंद शर्मा की यात्रा शुरू होती है और सूर्य कुमार शर्मा की समाप्ति होती है।
सूर्य कुमार शर्मा के अरविंद शर्मा बनने की कहानी सुनिये उनकी जुबानी से।
इस समय सुबह का समय था। यह दिन मुझे नहीं याद है, लेकिन यह 1974 का वर्ष था जब देश इंदिरा गांधी के तानाशाही व्यवहार से नाराज होकर सड़कों पर उतर आया था। नौजवान, बूढ़े और बच्चे सब दीवाने थे। और हर किसी के पास काम थे। मेरी उम्र को देखकर पत्र या संदेश भेजा जाता था। यह भी मेरे लिए एक रोमांचपूर्ण कार्य था। जब कोई पत्र कहीं से कहीं ले जा रहा होता, मुझे लगता था कि सड़क पर खड़े सभी लोग सरकारी खुफिया हैं और मुझे पकड़ने के लिए खड़े हैं। और तब मुझे लगता था कि यह पत्र इंदिरा गांधी की तानाशाही सरकार को तोड़ देगा।
और वह दिन को जाने…
यह गांधी मैदान के पास था। मैं साइकिल पर वहाँ पहुंचा। गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक चिट्ठी दी। उस दिन आंदोलन में शामिल दस लोगों को पत्र भेजना था। गांधी मैदान के पास सभी पत्रों को रोक दिया गया। मैं अकेला नहीं था। मैं समस्या को समझने में देर नहीं लगाई। मैंने उनकी नजरें बचा कर अरविंद शर्मा को कापी पर लिखा। फिर बैठ गया, सांस लेते हुए। अधिकारी ने हर बच्चे से पूछा कि सूर्या शर्मा कौन है। मेरा नाम हे या वो है, सबने कहा। मैं भी बताया कि मेरा नाम अरविंद शर्मा है जब मेरी बारी आई। और फिर उसने सिर्फ इतना कहा कि सर, इसका नाम अरविंद शर्मा है। पुलिस ने अरविंद शर्मा का नाम पुकारा जब उनका जन्मदिन था। और फिर यही नाम लोकप्रिय होने लगा, और मैं भी उससे प्रेम करने लगा।
पद-प्रतिष्ठा की भूख नहीं लगी थी
तीन दशक से बीजेपी का बीट देख रहे पत्रकारों का कहना है कि वे कभी भी अखबार में नाम या बीजेपी अधिकारियों से पद की लालसा नहीं करते हैं। सूचनानुसार
1.पटना युवा मोर्चा का अध्यक्ष
2.अरवल जिला प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह के कार्यकाल में जिला प्रभारी बनाई गई हैं
3.बीजेपी के फायर ब्रांड नेता ने नवादा को जिला पार्टी अध्यक्ष को बनाया गया हैं
4.मुख्यमंत्री श्री चौधरी ने अरविंद शर्मा को मुख्यालय और कार्यालय प्रभारी नियुक्त किया।
पर सम्मान बहुत अधिक थ जानें?
पार्टी में अरविंद शर्मा को सम्मान देने और पाने में कोई भी सक्षम नहीं है। आज भी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अरविन्द शर्मा का नामांकन किया।