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Shivaratan Agarwal: बीकाजी की स्थापना करने वाले शिवरतन अग्रवाल कौन थे? बीकानेर की भुजिया को ‘अंतरराष्ट्रीय ब्रांड’ वाले ने छोड़ा

Shivaratan Agarwal का निधन होता है: चेन्नई में बीकाजी फूड्स के सीईओ शिवरतन अग्रवाल की निधन हो गई। 1993 में हल्दीराम से अलग होकर शिवरतन ने मशीन से भुजिया बनाकर इस क्षेत्र में क्रांति ला दी थी। एक साधारण आठवीं से बड़े भामाशाह तक उनका सफर जानिए।

बीकानेर: गुरुवार सुबह चेन्नई में 74 वर्ष की उम्र में बीकानेर के स्वाद को सात समंदर पार तक पहुंचाने वाले ‘बीकाजी’ के संस्थापक और सीएमडी शिवरतन अग्रवाल की निधन हो गई। बीकानेर के उद्योग जगत सहित पूरा शहर उनके निधन की खबर से दुखी है। बीकानेर में उन्हें ‘फन्ना बाबू’ कहते थे।

वे पिछले दस दिनों से चेन्नई में अपनी पत्नी पर हार्ट बायपास ऑपरेशन कर रहे हैं। वे गुरुवार सुबह लगभग 7:30 बजे दिल का दौरा पड़ने से मर गए।

हल्दीराम से अलग होने के बाद,बीकाजी तक की यात्रा

किसी फिल्म की सफलता की कहानी से कम नहीं है शिवरतन अग्रवाल। उन्होंने साबित किया कि बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बड़ी डिग्रियां नहीं, बल्कि एक महान विजन चाहिए।

  • 8वीं स्थान पर रहते हुए भी विश्व विजेता बनने की इच्छा: शिवरत अग्रवाल ने केवल आठवीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन उन्होंने व्यापार में अद्भुत समझ विकसित की थी।
  • पारिवारिक विरासत से अंतर: 1986 में अपने पारिवारिक व्यवसाय ‘हल्दीराम’ को विभाजित करने के बाद शिवरतन अग्रवाल ने अपनी खुद की अलग पहचान बनाने का फैसला किया। शिवदीप फूड्स प्रोडक्ट्स उनका नाम था।
  • नाम से जुड़ा रहस्य: वे बीकानेर की संस्कृति से अपने ब्रांड को जोड़ना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपने ब्रांड का नाम ‘बीकाजी’ रखा, जो आज घर-घर में जाना जाता है, बीकानेर के संस्थापक राव बीका के नाम पर।

दुनिया की पहली ‘मशीनी भुजिया’ बनाने के लिए सम्मान

एक समय था जब भुजिया सिर्फ हाथों से बनाई जाती थी। विदेशों में शिवरतन अग्रवाल ने विचार किया कि क्या इस भारतीय स्नैक को मशीनों से बनाया जा सकता है। देश में मशीन से भुजिया बनाने की पहली इकाई उन्हें बनाई गई। जिससे बीकाजी की शुद्धता और स्वाद विश्वस्तरीय मानकों पर खरा उतरा, बीकाजी ने भारत में पहली बार मशीनों से मेकिंग और पैकिंग शुरू किया।

सामाजिक सेवा: बीकानेर का महान भामाशाह

शिवरतन अग्रवाल बीकानेर के सबसे दयालु भामाशाहों में से एक थे और एक सफल उद्योगपति भी थे। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं के लिए उन्होंने अपनी संपत्ति हमेशा उपलब्ध कराई। बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बीकानेर को दुनिया भर में जाना जाएगा और समाजसेवा में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। पर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अग्रवाल के निधन पर शोक व्यक्त किया।

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