बुधवार को मास्टर ब्लॉस्टर और छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके के बच्चे, जो कभी नक्सलवाद को जन्म देते थे, एकत्र हुए। यहां सचिन तेंदुलकर, उनकी बेटी सारा और उनकी पत्नी पहुंची थीं। सचिन ने सौ खेल मैदान बनाने का वादा किया है। यहां वे बहुत साधारण लगे। सचिन ने कहा कि इस खेल में प्रतिभाओं को वैश्विक मंच मिलेगा…।
रायपुर: Master Blaster in Dantewada अब बस्तर को जंगलों और संघर्ष से नहीं, बल्कि खेल के मैदानों और शानदार लोगों से भी जाना जाएगा। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर जब दंतेवाड़ा के छिंदनार गांव में अपने परिवार के साथ पहुंचे, तो फिजा ही बदल गई। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में इंद्रावती नदी के तट पर पहली बार ‘सचिन-सचिन’ के नारों ने उम्मीद जगाई।

बस्तर में अनेक हीरे हैं, हम उन्हें खोजेंगे।
मैदान पर बच्चों का उत्साह सचिन को भावुक कर दिया। मंच पर उन्होंने कहा, “जब मुझे पता चला कि यहां टैलेंट तो है, लेकिन खेलने के लिए जगह नहीं, तो मुझे अपना बचपन याद आ गया।”मैं यहां सौ से अधिक खेल मैदानों की स्थापना में मदद करूँगा, पचास नहीं। बस बस्तर जाओ, वहाँ हजारों हीरे छिपे हैं।
रस्साकशी में सचिन हार गया, सारा तेंदुलकर की टीम जीती
मैदान पर सचिन ने बच्चों के साथ रस्साकशी (Tug of War) खेली, जो दिलचस्प था। सचिन तेंदुलकर एक ओर और उनकी बेटी सारा तेंदुलकर और पुत्रवधु सानिया तेंदुलकर दूसरी ओर थे। सारा की टीम इस कठिन मुकाबले में विजयी हुई। सचिन ने हारने के बावजूद भी बच्चों के साथ वॉलीबॉल खेला और बहुत मज़ा लिया।
दोस्ती पर दी गई “आईना और परछाई” सीख
सचिन ने बच्चों को जीवन का महत्वपूर्ण मंत्र सिखाया। “एक सच्चा दोस्त आईने और परछाई जैसा होना चाहिए,” उन्होंने कहा। आईना झूठ कभी नहीं बोलता और परछाई कभी नहीं छोड़ती।साथ ही, उन्होंने अपने पिता से सीखा कि एक अच्छे इंसान बनना जीवन भर की उपलब्धि है, लेकिन क्रिकेट करियर के लिए सीमा हैं।
यह दौरा बस्तर के लिए आख़र खास क्यों है जाने
बस्तर में खेल क्रांति होगी। 100 खेल मैदानों का निर्माण स्थानीय युवा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मंच देगा। वहीं, मानदेशी फाउंडेशन और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन ने मिलकर खेल में शिक्षा और कोचिंग देने वाले शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई है।