Hanuman Beniwal की खबर: हनुमान बेनीवाल फिर से राज्य की राजनीति में चर्चा में हैं। 21 अप्रैल को रात 2 बजे, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री खर्रा की बेटी की शादी में रालोपा अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल पहुंचे। उन्होंने देर रात होने के बावजूद कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज की।
सीकर: राजस्थान की राजनीति में प्रतिष्ठित हनुमान बेनीवाल का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे शादी में रात दो बजे पहुंचकर वर वधु को आर्शीवाद देते हुए दिखाई देते हैं। वास्तव में, राजस्थान सरकार के नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा की सुपुत्री अर्चना का विवाह समारोह था। RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल का काफिला दोपहर 2 बजे सीकर जिले के भारणी गांव में शादी में पहुंचा। आधी रात में शादी में पहुंचने पर भी वे बहुत उत्साहित थे।

बेनीवाल ने देर रात पहुंचने का कारण जानना
बेनीवाल सीकर से श्रीमाधोपुर पहुंचने में देरी हुई क्योंकि उसे उत्साहजनक स्वागत मिला था। 21 अप्रैल को उन्हें कई शादियों में भी जाना था। मंत्री खर्रा की बेटी की शादी में रात के दो बज गए थे। फिर भी उनके इंतजार कर रहे समर्थकों में उत्सुकता थी। आधी रात में भी सेल्फी लेने की भीड़ लगी रही।
क्या यह प्रमुख कारण है?
रालोप प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने वर्ष-2028 में राजस्थान विधानसभा में होने वाले आम चुनाव को ‘करो या मरो’ करार दिया है, जिसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि उचित नतीजे निकल सकें। उसकी पिछले कुछ समय से देशव्यापी सक्रियता का संकेत यह है कि वह “अभी नहीं तो कभी नहीं” हैं, और वह अपने समर्थकों को बार-बार बताते हैं कि यह उनकी आखिरी लड़ाई है, और अगर वह इसमें सफल रहे तो सेवा करते रहेंगे, और अगर वह “धोखा” पाया तो अपने संघर्ष को समाप्त कर देंगे।
कड़ी मेहनत करने वाले और विशेष रूप से उत्साहित नेता
वास्तव में, आज राजस्थान में हनुमान बेनीवाल ही एकमात्र नेता है जो दिन को दिन में और रात को रात में समझता है। नागौर सांसद, यूडीएच मिनिस्टर जावर सिंह खर्रा की सुपुत्री अर्चना की शादी में कल रात 2:00 बजे सीकर जिले के धरनी में पहुंचे, तो उनके समर्थकों का उत्साह उफान पर था। कांग्रेस, बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं को बेनीवाल ने अपने समर्थकों की दीवानगी के बल पर आड़े हाथ लेते रहे हैं, हालांकि उनके कटु विरोधी इस व्यवहार को बडबोलपन बताते हैं।
अब हनुमान बेनीवाल देर रात तक कार्यक्रमों में जाना आम है। उनका अर्धरात्रि बाद शादी, आंदोलन के मंच, पार्टी की बैठकों और जागरण में भी आना आम हो गया है। समर्थकों का मानना है कि उनकी देर से लतीफी उनकी लोकप्रियता को बढ़ाती है
लोग उनके अंदाज और शैली कायल हैं
यह दिलचस्प कहानी है कि कैसे बेनीवाल ने नागौर के सूरमाओं की राजनीति को तोड़ डालकर राज्य का सबसे बड़ा राजनीतिज्ञ बन गया। प्रदेश के किसी भी राजनेता को हाथों-हाथ हजारों लोगों को इकट्ठा करने की क्षमता नहीं है, हालांकि उन पर ‘जाटवाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में पीड़ितों को न्याय दिलाने का उनका प्रयास हर किसी का कायल है।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव में प्रासंगिकता बनाए रखना भी एक चुनौती है क्योंकि बेनीवाल ने भाजपा और कांग्रेस से गठबंधन करके संसद में प्रवेश कर लिया था, लेकिन खींवसर की हार ने उनका बहुत बड़ा सबक दिया था। उनके पास नागौर और कुछ जिलों में आरएलपी को सत्ता में लाने की कोशिश के बीच मिल रहे जन समर्थन को वोटो में बदलने की भी बड़ी चुनौती है। हालाँकि, राजस्थान राज्य की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के नेताओं की चर्चा कम होती है और हनुमान बेनीवाल का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।वह आने वाले चुनाव में कुछ बड़ा करते हैं और सत्ता में आते हैं या फिर राजनीतिक मंच से दूर चले जाते हैं?