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मायावती खबर: महिला आरक्षण अधिनियम को लागू किया, उनके बाद , कांग्रेस, बिजेपी और सपा तीनों पर सवालों का बाण चलाया

महिला आरक्षण कानून को लागू करने के पश्चात मायावती ने बीजेपी, कांग्रेस और सपा को घेर ली गईं हैं। मुसलमानों, दलितों और पिछड़ों को सतर्क रहना चाहिए और किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए, यह उनकी सलाह थी।

महिला आरक्षण अधिनियम 2023 अब लागू हो गया है, जो राज्य और लोकसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देगा। सरकार ने इसकी सूचना भी दी है। मायावती, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष, ने इस पर प्रतिक्रिया दी है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट पोस्ट की है।

मायावती ने कांग्रेस को ‘गिरगिट’ कि तरह रंग बदलने वाला बताया

मायावती ने अपने भाषण में बीजेपी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को सख्त घेर लिया। कांग्रेस को उन्होंने “गिरगिट” कहा और कहा कि यह पार्टी बार-बार अपना रुख बदलती है। उनका दावा था कि कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू करने का कोई प्रयास नहीं किया।

मायावती ने भी सपा और बीजेपी को घेर लिया गया

मायावती ने समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में ओबीसी को पिछड़े मुस्लिमों का लाभ देने के मुद्दे पर भी घेरा लिया गया उनका कहना है कि 1994 में आई रिपोर्ट को सपा सरकार ने नहीं लागू की, जबकि बसपा सरकार ने 1995 में इसे लागू की गई। मायावती ने कहा कि सपा और अन्य पार्टियां विपक्ष में रहते हुए अलग-अलग बातें करती हैं, लेकिन सत्ता में आने पर उनका नजरिया बदल जाते हैं। वे इसे “दोहरा चरित्र” कहा और लोगों को ऐसी पार्टियों से सावधान रहने की सलाह दी।

विपक्ष को परिसीमन की चेतावनी दी गईं हैं

मायावती ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण को जल्द ही लागू करना होगा। उसने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस सरकार में होती तो बीजेपी की तरह व्यवहार करती। अंत में मायावती ने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के हितों को लेकर कोई भी पार्टी पूरी तरह गंभीर नहीं रही है। ऐसे में अभी उपलब्ध आरक्षण को स्वीकार करना चाहिए और समाज को आत्मनिर्भर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

बसपा सुप्रीमो ने अपनी बात को सात बिंदुओं में समझाया

1.कांग्रेस भी SC, ST और OBC समुदायों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के मामले में रंग बदलती है। कांग्रेस ने केंद्रीय सरकार के दौरान महिला आरक्षण का कोटा पूरा नहीं किया है।

2.OBC समाज के लिए मण्डल कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण भी नहीं मिला। BSP के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री श्री वीपी सिंह की सरकार ने इसे अनिवार्य रूप से लागू किया था।

3.ठीक उसी तरह, जुलाई 1994 में यूपी में पिछड़े मुस्लिमों को OBC का लाभ देने वाली पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने खारिज कर दिया था। 3 जून 1995 को बीएसपी की पहली सरकार ने इसे तत्काल लागू किया, लेकिन अब सपा महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है।

4.इस मामले में भी सपा, अन्य मामलों की तरह, जातिवादी और तिरस्कारी रवैया अपनाती है, लेकिन जब वह सरकार में है तो अलग। यही कारण है कि इन सभी वर्गों को मिलकर काम करने के लिए ऐसे दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

5.जब बात महिला आरक्षण की है, तो पिछली जनगणना (सन् 2011) के आधार पर इसे जल्दी लागू करना चाहिए, तो इसे इसी जनगणना के आधार पर करना चाहिए. अगर कांग्रेस वर्तमान में सत्ता में होती, तो यह पार्टी भी बीजेपी की तरह ही ऐसा करती।

6.कुल मिलाकर, देश में कोई भी राजनीतिक दल SC, ST, OBC या मुस्लिम समाज का वास्तविक हित, कल्याण या भविष्य संवारने के किसी भी मामले में गंभीर नहीं रहा है।

7: महिला आरक्षण के मामले में, इन वर्गों को पहले जो मिलेगा, उसे स्वीकार करना चाहिए, फिर उनके हितों का पूरा ध्यान रखा गया। उन्हें किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए, क्योंकि उनका लक्ष्य समाज को मजबूत और स्वतंत्र बनाना है। इसमें सुझाव शामिल हैं।

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