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राजस्थान में एक नया रेलवे कॉरिडोर, 827 किलोमीटर का बनने जा रहा, जो पाकिस्तान सीमा से होकर गुजरेगी , जिनमें 10 लगभग हज़ार करोड़ कि लागत, पढ़िए कहा से कहा तक

827 किलोमीटर का बनने जा रहा नया रेलवे कॉरिडोर राजस्थान की सीमा पर बनेगा। जिससे 10,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और अनूपगढ़ को नया रेल नेटवर्क से जोड़ पाएगा

जयपुर: राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर, जहां अब तक केवल रेतीले धोरों और ऊंटों के पैरों के निशान थे, जल्द ही ट्रेनों की गूंज सुनाई देगी। केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी 827 किलोमीटर लंबे नए रेलवे कॉरिडोर की अनुमति दी है. यह पाकिस्तान से सटे जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों को देश की मुख्यधारा से जोड़ेगा। मरुधरा की आर्थिक और सामरिक स्थिति इस परियोजना से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत आ सकती है।

सेना में “गेम चेंजर” बन जाएगा जाने

यह रेल कॉरिडोर आम यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि भारतीय सेना के लिए एक “मास्टरस्ट्रोक” है। युद्ध या आपातकालीन स्थिति में भारी सैन्य सामान, टैंक और जवानों की तैनाती कुछ घंटों में सीमावर्ती क्षेत्रों में सीधी रेल कनेक्टिविटी होने से हो सकेगी। अब तक सेना इन दुर्गम इलाकों में सड़क मार्ग पर निर्भर थी, लेकिन इस रेल नेटवर्क के बिछने से देश की सुरक्षा दीवार और भी ज्यादा अभेद्य हो जाएगी

जानिए अभी कहा तक पहुंच चूका हैं काम चल रहा है वो

उत्तर पश्चिम रेलवे ने इस बड़े कॉरिडोर को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया है।

  • जैसलमेर से बाड़मेर तक: करीब 380 किलोमीटर लंबी इस लाइन का अंतिम स्थान सर्वे की अंतिम स्टेज में है।
  • जैसलमेर से खाजूवाला: 260 किलोमीटर की इस रेल लाइन पर सर्वे कार्य तेजी से चल रहा है।
  • अकोला-बीकानेर: 187 किलोमीटर लंबी और 2,277 करोड़ रुपये का निवेश वाली नई लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है।

सरहदी गांवों की स्थिति में सुधार होगी अब जानें

यह कॉरिडोर सीमावर्ती गांवों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो विकास की दौड़ में अब तक पिछड़े रहे हैं। रेल सुविधा मिलने से मरुस्थलीय पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय किसानों के कृषि उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा। यह न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन को कम करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

आज के स्टेशनों का जाल बिछ रहा

रेलवे ने स्टेशनों की मरम्मत भी की है, साथ ही पटरी भी बनाई है। जैसलमेर और बाड़मेर स्टेशनों में अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं, जबकि अनूपगढ़, सूरतगढ़ और श्रीगंगानगर जैसे स्टेशनों को आधुनिक बनाया जा रहा है। सीपीआरओ (उत्तर पश्चिम रेलवे) अमित सुदर्शन ने बताया कि एक परियोजना का डीपीआर तैयार है और अन्य पर काम चल रहा है। यह सिर्फ सुरक्षा नहीं देगा, बल्कि सरहदी जिलों को बेहतर बनाएगा।

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