रामायण महाकाव्य पर बनाई गई कितनी भी फिल्में, सीरीज और शोज आ जाएं, लेकिन रामानंद सागर के सीरियल की बराबरी कोई नहीं कर पाया। लोग इतने उत्सुक थे कि शवों को भी रामायण दिखाया जाता था, जो रामानंद सागर ने अपने खून-पसीने से सींचा था। एक लड़का वहीं कोमा से जाग गया। देखें दोनों कहानियां:
रामानंद सागर ने जो ‘चमत्कार’ किया था, उसकी कोई भी बराबरी नहीं कर पाएगी, फिर भी कई वर्ष बीत चुके हैं और आगे भी बीतेंगे। फिर चाहे कितनी भी फिल्में और सीरियल इस महाकाव्य पर बनें। रामानंद सागर की ‘रामायण’ की शूटिंग के दौरान कई चमत्कार हुए, लेकिन प्रसारण के दौरान कई जगहों से इसके चमत्कारों की खबरें आईं, जो सभी को हैरान कर दिया, जीवन की महानता: रामकृष्ण सागर: From Barsaat to Ramayan भी इनका जिक्र करता है। आपको हैरान होगा कि ‘रामायण’ का क्रेज इतना बड़ा था कि लाशों को कुर्सी पर बिठाकर अंतिम बार देखा जाता था। 15 साल का एक लड़का, जो कई दिनों से कोमा में था, ‘रामायण’ को देख होश में आया। इस स्थान पर दो कहानियां सुनाई जाती हैं:

1987 में रामानंद सागर का शो ‘रामायण‘ पहली बार प्रसारण हुआ और बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला। रविवार को सुबह 9 बजे से 9:30 बजे प्रसारण हुआ। तब सभी सड़कें और गली खाली हो गईं। लोगों ने घरों में टीवी देखा। जब लोग बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर हैं, चाहे वे सो जाएं या ट्रेन-बस छूट जाएं, वे वहीं पर ‘रामायण’ देखने लगते हैं। सबके मन में भगवान राम और सीता को देखना था।
रामानंद सागर ने कहा कि चाहे बंगला बेचना पड़े, ‘रामायण’ बनाना चाहिए
रामानंद सागर ने जब “रामायण” बनाया था, तो उन्होंने भी नहीं सोचा था कि इसे इतना प्यार मिलेगा और पीढ़ियों तक याद रहेगा। मोती सागर, उनके बेटे, ने ‘पीटीआई’ को बताया कि उनके पिता ने ‘रामायण’ बनाना चाहा था और उन्होंने अपने चारों बेटों से कहा कि वह ‘रामायण’ बनाकर रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपना घर ही बेचना पड़े।
“रामायण” बनाना मुश्किल था, लेकिन चमत्कार हुआ
उन्हें बहुत मुश्किलों और बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने ‘रामायण’ बनाकर ही दम लिया। और देश भर में टेलिकास्ट होने पर ‘चमत्कारों’ की कहानियां सुनने और देखने को मिली।
शवों को कुर्सी पर बिठाकर ‘रामायण’ दिखाते थे
पुस्तक में कहा गया है कि जब कोई मर जाता था और उसकी अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी, तो उसे “रामायण” की वजह से रोक दिया जाता था। शवों को पूरे सम्मान के साथ कुर्सी पर बिठाया जाता था और उनकी आंखें खुली रखकर अंतिम बार ‘रामायण’ दिखाया जाता था। माना जाता था कि इससे भगवान की शरण पाने और सदगति करने का उनका रास्ता आसान होगा।
अस्पताल में कोमा से जागने वाले लड़के की कहानी
15 वर्षीय एक लड़के की कहानी है। किताब में उसका उल्लेख है और अली पीटर जॉन ने इसे बताया है। बॉम्बे के होली स्पिरिट अस्पताल के कॉमन वार्ड में उस लड़के को भर्ती किया गया था। हर दिन उसकी मां और बहन उससे मिलने आती थीं और उसकी यादों को वापस लाने की कोशिश करती थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अस्पताल में रविवार की सुबह टीवी पर रामायण देखने के लिए कोई व्यक्ति आया।
‘रामायण’ का प्रभाव डॉक्टरों और सभी को हैरान कर दिया।
उस लड़के का चेहरा तभी बदल गया जब वह “रामायण” देखने लगा। वह लड़का एपिसोड खत्म होते ही अचानक कोमा से बाहर आ गया। होश में आते ही उसने सभी से पूछा कि क्या लक्ष्मण, जो इंद्रजीत के बाण से बेहोश हो गया था, जीवित हैं या नहीं। डॉक्टर भी भागे-भागे लड़के को होश में देखे। लड़के की बहन और मां भी उसे ठीक देख हैरान रह गईं और रोते हुए गले लगा लिया। वहां मौजूद सभी लोग इस चमत्कार से हैरान थे।