योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की विरासत और सामाजिक न्याय को बचाने का महत्वपूर्ण फैसला किया है। “डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना” राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दी है। यह अभियान प्रत्येक अंबेडकर मूर्ति पर बाउंड्री वॉल और छत्र (छाया) बनाने का लक्ष्य रखता है।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने सामाजिक न्याय और राज्य की विरासत को बचाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। “डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना” को राज्य कैबिनेट ने अनुमोदित किया है। यह योजना है कि सभी अंबेडकर प्रतिमाओं पर बाउंड्री वॉल और छत्र लगेंगे। इस योजना का लक्ष्य प्रदेश में स्मारकों का व्यापक विकास करना है, जिस पर 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

10 स्मारकों का निर्माण प्रत्येक विधानसभा में
इस व्यापक कार्यक्रम के अंतर्गत, उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा में भीमराव अंबेडकर से जुड़े दस महत्वपूर्ण स्थानों और स्मारकों का निर्माण किया जाएगा। इन स्थानों को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि सुंदर भी किया जाएगा ताकि वे प्रेरणा और सामाजिक जागरूकता के केंद्र बन सकें।
विभिन्न महापुरुषों की प्रतिष्ठा भी शामिल होगी
सरकार ने इस कार्यक्रम को अंबेडकर तक नहीं सीमित रखा है। इसमें समाज सुधारकों के स्मारकों का भी विकास होगा, जैसे संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि। इससे ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक एकता बढ़ेगी।
CM योगी ने पूर्व में घोषणा की थी
इस योजना को योगी आदित्यनाथ ने पहले ही एक जनसभा में जारी किया था। उन्होंने कहा कि राज्य में जहां भी अंबेडकर की प्रतिमा है, वहां छत्र लगाए जाएंगे, आसपास के पार्कों को सुंदर बनाए जाएंगे और बाउंड्री वॉल बनाए जाएंगे। इस घोषणा को लागू करने के लिए अब ठोस कार्रवाई की गई है।
2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषक भी इस फैसले को महत्वपूर्ण मानते हैं। दलितों का वोट बैंक उत्तर प्रदेश में लगभग 22 प्रतिशत है और 150 से अधिक विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह कदम दलित मतदाताओं को आकर्षित करने का एक प्रयास है।
बदलते राजनीतिक समीकरण को जानें
“डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना” केवल एक विकास कार्यक्रम नहीं है; यह एक सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम है। इससे ऐतिहासिक विरासत को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और सामाजिक समीकरणों को नियंत्रित करने की योजना भी स्पष्ट दिखाई देती है।