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बीजेपी ने बिहार में महिला सीएम को लेकर बहस किया जा रहा , जातीय विसंगतियों  से बचने के लिए इन तीन महिला दिग्गजों पर नजर झुकाया गया पूरा पढ़िए

बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि क्या भाजपा जातीय विसंगतियों से बचने के लिए मुख्यमंत्री पद पर किसी महिला को चुनने की योजना बना रही है। आइए देखें कि इस प्रतियोगिता में किन तीन महिलाओं का नाम आया है।

पटना: जातीय असमानता से बचने के लिए क्या बीजेपी बिहार में महिला मुख्यमंत्री उम्मीदवार पर विचार नहीं कर रही है? कारण बताया जा रहा था कि एक जाति या वर्ग को पद देकर दूसरी जाति या वर्ग को नाराज़ क्यों करना चाहिए था? यह चर्चा है कि बीजेपी आधी आबादी की ओर झुककर किसी महिला को मुख्यमंत्री पद देने जा रहा है, इससे बचने के लिए। सभी को पता है कि इस बहस में कौन हैं..।

पहला नाम श्रेयसी सिंह है जानें

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और वर्तमान में नीतीश सरकार के मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण मंत्री श्रेयसी सिंह का नाम महिला मुख्यमंत्री की दौड़ में तेजी से उछाला गया है। शूटिंग में श्रेयसी सिंह ने भारत को कई मेडल दिलाए हैं। इनकी प्रतिभा के अलावा, इनका राजनीतिक रसूख भी काफी खानदानी है। इनके पिता, दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री रहे हैं, जो एक वरिष्ठ नेता था। इनकी मां पुतुल देवी भी एक सांसद थीं। फिलहाल, वे जमुई से विधायक हैं और इस समय खेल मंत्री भी हैं। साथ ही इनकी छवि स्पष्ट है। युवाओं के आइकन बनने के लिए बिहार को बदलने की कोशिश करेंगी। बीजेपी उन्हें सीएम बनाकर आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करेगा और राजपूतों की नाराज़गी दूर करेगा।

सांसद धर्मशीला गुप्ता जानें

इस रेस में सांसद धर्मशीला गुप्ता भी हैं। बीजेपी इनके माध्यम से भी बिहार की आधी जनसंख्या, खासकर वैश्यों, को लुभाना चाहती है। वैसे, 2022 में धर्मशीला गुप्ता ने दरभंगा नगर निगम के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। उन्होंने बढ़ चढ़कर राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में भाग लिया। उन्हें शुरू में दरभंगा जिला भाजपा महिला प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। और अब राज्यसभा के सदस्य हैं।

तीसरा नाम रमा निषाद है

रमा निषाद की जाति बहुत पिछड़ी है। यह एक शक्तिशाली और सक्षम नेता हैं जो बहुत पिछड़े हैं। रमा निषाद ने राजनीति में एक अच्छी पकड़ बनाई है। ये दोनों पूर्व सांसद जय नारायण निषाद और उनकी पत्नी रमा निषाद हैं। इन्हें राजनीति विरासत में मिली है। बीजेपी इनसे आधी जनसंख्या को नियंत्रित कर सकती है और 35 प्रतिशत अतिपिछड़ा जनसंख्या को भी नियंत्रित कर सकती है।

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