लखीमपुर खीरी में एक जमीनी विवाद के कारण एक वकील को कचहरी में गोली मार दी गई। गोली मारने वाले दोनों चाचा भतीजे हैं, जो वकील हैं।
लखीमपुर खीरी: लखीमपुर खीरी में कचहरी क्षेत्र में गोली चलने से हड़कंप मच गया। सोमवार की सुबह, एक वकील ने जमीनी विवाद में अपने भतीजे को गोली मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों ने पहले हाथापाई की, लेकिन वहाँ उपस्थित वकीलों ने मामले को शांत कर दिया। लेकिन कुछ मिनटों बाद दोनों ने फिर से विवाद शुरू कर दिया। इस दौरान, वकील विराट राज ने अपने भतीजे जितेंद्र राज को गोली मार दी। जितेंद्र को पेट में गोली लगी, जिसके कारण वह तख्त पर गिर पड़ा।

वहा पर अफरा तफरी मच गया जानें
घटना ने मौके को हिला दिया। आरोपी विराट इस बीच मौके से भाग गया। बताया जा रहा है कि दोनों चाचा भतीजे आसपास के तख्त पर प्रैक्टिस करते हैं और वकील हैं। एसपी विवेक तिवारी और एएसपी पूर्वी पवन गौतम ने घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर मौजूद लोगों को बताया। पुलिस ने अनुसंधान शुरू कर दिया है।
घटना खेत की मेड़ की बहस से हुई है। प्राथमिक जांच में तमंचे से गोली मारने की पुष्टि हुई है। दुर्गा शक्ति नागपाल और एसपी डॉक्टर ख्याति गर्ग घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे।
लखनऊ में रेफर किया गया जानें
घायल अधिवक्ता को जल्दी ही जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे गंभीर हालत में लखनऊ रेफर कर दिया। डीएम-एसपी ने भी जिला अस्पताल में घायल अधिवक्ता से मुलाकात की।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न
लखीमपुर खीरी के कचहरी क्षेत्र में हुए गोलीकांड ने सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। दिनदहाड़े हुई इस घटना के बाद अधिवक्ताओं के साथ-साथ आम लोग भी भयभीत हैं। तमंचा लेकर कचहरी जैसे संवेदनशील और सुरक्षित स्थान में आरोपी कैसे पहुंचा? यह सबसे बड़ा सवाल है।
बताया जा रहा है कि वादी, प्रतिवादी, अधिवक्ता और आम लोग हर दिन कचहरी परिसर में आते-जाते हैं। ऐसे में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। इसके बावजूद, इस घटना ने साफ कर दिया कि प्रवेश द्वार पर तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा आने-जाने वालों की पर्याप्त जांच नहीं की जा रही है। संभवतः आरोपी हथियार लेकर अंदर नहीं आ सकता अगर सघन तलाशी की जाती।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकताएं कर रही है। कई लोगों ने यह भी मांग की है कि सभी को अनिवार्य जांच कराई जाए और क्षेत्र में अधिक सीसीटीवी कैमरों और मेटल डिटेक्टर लगाए जाएं।
बिना रजिस्ट्रेशन के भी वकालत किया जा रहा
सूत्रों ने बताया कि इस मामले में चौंकाने वाली एक और जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि घटना से जुड़े दोनों चाचा-भतीजे वकालत कर रहे थे, बिना बार काउंसिल में पंजीकरण कराए। यदि यह सच है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि न्याय व्यवस्था की साख पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।