विश्व वन दिवस: झारखंड में वन क्षेत्र में लगातार 58 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है। वहीं, बाघ-हाथी परियोजना, वन उत्पादों में बढ़ोतरी और वनभूमि की सुरक्षा के लिए बजट मंजूर किया गया है।
रांचीः झारखंड राज्य के गठन के बाद सूबे में अधिक वन क्षेत्र है। 2001 से 2023 तक, क्षेत्रफल 22,490 किमी से 23,765.78 किमी बढ़ा। कुल 1,275.78 वर्ग किमी वन क्षेत्र इस दौरान बढ़ा। 2021 से 2023 तक वन क्षेत्र 58.81 वर्ग किमी बढ़ गया।

वन विभाग ने बड़े पैमाने पर वन और गैर-वन भूमि पर वृक्षारोपण और वन सुरक्षा समितियों के सहयोग से वनों की सुरक्षा के लिए उठाये गये कदमों से ही वन क्षेत्र की वृद्धि की है।
34.38 प्रतिशत में वृक्षावरण और वनीकरण
वर्त्तमान में राज्य में 23,765.78 वर्ग किमी. वन क्षेत्र है और 3.637.55 वर्ग किमी. वृक्ष क्षेत्र है, वन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार। कुल मिलाकर, राज्य में 27.403.33 वर्ग किमी वन क्षेत्र है, जो राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का 34.38 प्रतिशत है।
58.81 वर्ग किमी का विस्तार किया गया वनावरण में
भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून के इंडिया स्टेट ऑफ फोरेस्ट रिपोर्ट, 2023 के आकलन के अनुसार राज्य में 2021 की तुलना में वनावरण में 58.81 वर्ग किमी की वृद्धि हुआ हैं
आग की सुरक्षा के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट को बनाया गया
यह अग्नि रोकथाम और प्रबंधन योजना (केंद्र प्रायोजित; 60:40) है। इसके लिए पांच करोड़ का बजट रखा गया है, जिसमें राज्यांश में २०० लाख का बजट उपबंध और केन्द्रांश में ३००० लाख का बजट उपबंध स्वीकृत है।
इस योजना में स्थानीय वन अधिकारी के निर्देशानुसार ग्राम वन समिति के सदस्यों को अग्नि रेखा की सफाई-निर्माण, अग्नि सुरक्षा के अन्य उपायों का निर्माण और वन अग्नि बुझाने, उपकरण खरीदने के लिए प्रशिक्षण देना शामिल है। स्वीकृत कार्य योजना के अनुसार भारत सरकार की ओर से दी गई धनराशि के अनुसार काम किया जाएगा।
12.08 करोड़ रुपये व्याघ्र और हाथी परियोजना के लिए
व्याघ्र और हाथी प्रोजेक्ट (60:40): यह एक केन्द्र प्रायोजित योजना है, जिसका राज्यांश 530.00 लाख और केन्द्रांश 678.00 लाख का बजट उपबंध स्वीकृत है, कुल 12.08 करोड़ रुपये। इस योजना का लक्ष्य पलामू व्याघ्र आरक्ष और हाथी परियोजना के तहत अधिसूचित क्षेत्रों में कई कार्यों को पूरा करना है।
वनवास के लिए 5 करोड़ की व्यवस्था किया गया हैं
वन्यप्राणी पर्यावास का समेकित विकास (केंद्र प्रायोजितः 60:40) एक केन्द्रीय योजना है, जिसका कुल बजट उपबंध 5 करोड़ है, जिसमें राज्यांश में 200,000.00 लाख और 300,000.00 लाख का बजट उपबंध स्वीकृत है। इस योजना में ग्यारह वन्य जीवों का पर्यावास विकसित किया जाएगा।
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