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जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ब्राह्मणों के खिलाफ हेट बोलना दंडनीय अपराध है, तो दूसरों के लिए क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने ब्राह्मणों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण भाषण को जाति-आधारित दंडनीय अपराध घोषित करने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी समुदाय के खिलाफ गलत बोलना स्वीकार्य नहीं है और सभी को नफरत के खिलाफ लड़ना चाहिए। याचिकाकर्ता ने बाद में याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी, जो अदालत ने दी।

नई दिल्ली: शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ब्राह्मणों के खिलाफ घृणापूर्ण भाषणों को जाति-आधारित भेदभाव के रूप में दंडनीय अपराध मानने की गुहार खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि हम किसी भी समुदाय के खिलाफ शत्रुतापूर्ण भाषण नहीं करना चाहते हैं, चाहे ब्राह्मण हों या नहीं।

कोर्ट ने कहा कि लोग अक्सर अपने समुदाय को गलत तरीके से निशाना बनाने पर आवाज उठाते हैं। नफरत के खिलाफ लड़ाई सिर्फ अपने समुदाय तक सीमित नहीं है। इस तरह के चीज सभी के लिए करना चाहिए।

याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया गया

याचिकाकर्ता महालिंगम बालाजी ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि ब्राह्मणों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण भाषण पर कानूनन कार्रवाई की जाए। एजेंसियां देखें कि क्या कोई संगठित अभियान चलाया जा रहा है जिसका मकसद हिंसा या नफरत फैलाना है। याचिका को कोर्ट ने वापस लेने की अनुमति दी।

  • पीठ ने कहा, “(शीर्ष अदालत के सामने) खुद उपस्थित हुए याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई हैं।” रिट याचिका वापस लिया हुआ मानकर खारिज की जाती है और उनका यह अनुरोध रिकॉर्ड पर दर्ज कि गई है।’

जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?

  • सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नगरत्ना ने पूछा कि किसी विशेष समुदाय को सिर्फ अपने खिलाफ नफरती भाषण से क्यों बचना चाहिए, दूसरों के खिलाफ क्यों नहीं?
  • उन्हें स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता विशेष मामलों को उचित मंचों पर लेकिन न्यायपालिका के सामने नहीं उठा सकते हैं, और किसी को भी नफरती भाषण में शामिल नहीं होना चाहिए।
  • पीठ ने कहा कि उसे न्यायपालिका के खिलाफ झूठे हमलों की चिंता नहीं है जब बालाजी ने कहा कि न्यायपालिका को भी सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने क्या मांग की गई थी

बालाजी ने अपनी याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से जाति-आधारित भेदभाव के दंडनीय रूप के रूप में ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ घृणापूर्ण भाषण को स्वीकार करने और ऐसे मामलों में तत्काल कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि अगर कोई संवैधानिक पदाधिकारी या जनसेवक ब्राह्मणों के खिलाफ जाति-आधारित शत्रुतापूर्ण भाषण करता पाया जाता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जाए।

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