NPTC Chatti Bariatu Coal Mines: हजारीबाग में NPTC के खनन क्षेत्र वाले इलाके में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव सहित कई रैयतों के घरों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। इस घर को 15 साल पहले योगेंद्र साव ने बनाया था।
हजारीबाग: गुरुवार को झारखंड सरकार में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर बुलडोजर चलाया गया। योगेंद्र साव और अन्य भू रैयतों का घर हजारीबाग में एनटीपीसी के चट्टी बरियातू कोल माइंस के सामने जोरदाग झुमरी टांड में बुलडोजर से तोड़ दिया गया। योगेंद्र साव ने 2011 में अपने घर का निर्माण किया था।

घर खनन क्षेत्र में बना था
खनन क्षेत्र में योगेंद्र साव और अन्य रैयतों का घर था। यह जमीन कोयला खनन के लिए चिह्नित की थी। इसलिए योगेंद्र साव सहित भू रैयतों को कई दिनों से घर खाली करने का आदेश दिया गया था। गुरुवार को एनटीपीसी और पुलिस की मौजूदगी में घरों को बुलडोजर चला कर तोड़ दिया गया।
बहुत अधिक पुलिस बल तैनात किया गया था
बुलडोजर चलाने की कार्रवाई में बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया था। पिछले कुछ दिनों में इस कार्रवाई को लेकर तनाव का वातावरण बना हुआ था। यह भी कहा गया था कि योगेंद्र साव ने एनटीपीसी अधिकारियों पर तीन-धनुष से हमला किया था। बाद में कंपनी ने कड़ी सुरक्षा के बीच बुलडोजर लगाया।
बुलडोजर चलने के समय पूर्व विधायक निर्मला देवी घर पर उपस्थित थीं
योगेंद्र साव ने अपने घर पर बुलडोजर चलाने के बाद राज्य सरकार और एनटीपीसी पर भी हमला बोला। उनका आरोप था कि पूर्व विधायक निर्मला देवी उनके घर में थीं जब उनका घर तोड़ा गया था। उनके घर को तोड़ दिया गया है, बिना मुआवजा दिए और समय दिए।
योगेंद्र साव ने बताया कि फिलहाल वह बड़कागांव में नहीं है और किसी दूसरे स्थान पर है। उन्हें पता चला कि उनका घर भारी पुलिस बल के साथ ध्वस्त हो गया है। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार इसका खामियाजा भुगतेगी।
भू रैयतों में घरों की क्षति होने पर उदासी
रैयतों में पूर्व मंत्री और अन्य प्रतिनिधियों का घर गिरा दिया गया है, जिससे वे बहुत नाराज हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि झारखंड सरकार द्वारा पुलिस को प्रदान किए गए हर बोलेरो को एनटीपीसी कंपनी के साथ मिलकर घरों को तोड़ने में भी इस्तेमाल किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एनटीपीसी किसानों और भू रैयतों का शोषण कर रहा है। कंपनी बिना बसाए भू रैयतो को बेघर कर रही है। स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, श्मशान घाट, सड़क और पानी की सुविधाएं नहीं थीं।
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