Bihar SIM Card धोखाधड़ी: बिहार में पिछले कुछ महीने में एक ही व्यक्ति का नाम बदलकर सिम बेचने का मामला सामने आया है। बहुत से सिम विक्रेता अवैध रूप से एक व्यक्ति पर दस से चालीस सिम कार्ड बेचते हैं।
पटना: बिहार में साइबर ठगी का एक आश्चर्यजनक तरीका सामने आया है जो सिम कार्ड का उपयोग करता है। अब तक चेहरा बदलकर सिम खरीदने के मामले आते थे, लेकिन अब एक ही चेहरे का उपयोग कर अलग-अलग नामों और पते पर दर्जनों सिम कार्ड जारी करने का खेल पकड़ा गया है। दूरसंचार विभाग ने ऐसे जालसाज सिम विक्रेताओं का पता लगाकर उन पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

ASTR अभ्यास कैसे कार्य करता है?
ASTR (Artificial Intelligence and Facial Recognition) विधि का उपयोग दूरसंचार विभाग की जांच में किया गया। इस नवीनतम AI टूल की मदद से सिम खरीदने वालों के चेहरों की तुलना की गई। परीक्षण में पता चला कि कई सिम विक्रेताओं ने एक व्यक्ति के चेहरे पर १० से ३० सिम कार्ड अवैध रूप से डाल दिए हैं। यह टूल तुरंत पकड़ लेता है कि चित्र को बदला गया है या एक ही चेहरे को बार-बार देखा जा रहा है।
सवा लाख सिम विक्रेता बिहार में
जैसा कि ठग अक्सर तस्वीर बदलकर अपनी असली पहचान छुपाते थे, इस बार सिम विक्रेताओं ने मिलकर फर्जी पहचान पत्र बनाए और गलत केवाईसी के जरिए थोक में सिम बेचे। विभाग के पास उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि किस विक्रेता ने, कब और कहां से ये नकली सिम बेचे हैं। बिहार में लगभग सवा लाख सिम विक्रेता सक्रिय हैं, जिनकी सघन जांच चल रही है।
महानिदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए: कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी
बुधवार को बिहार सर्किल के अधिकारियों ने दूरसंचार विभाग (भारत सरकार) के महानिदेशक आनंद खरे के साथ एक समीक्षा बैठक की। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गलत सिम बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दूरसंचार कंपनियों के दोषी कर्मचारियों को भी साइबर ठगों की मदद करने दिया जाएगा।
नया मुख्यालय होर्डिंग रोड पर बनाया जाएगा
बैठक के बाद महानिदेशक ने बिहार सर्किल के लिए दूरसंचार विभाग का नया भवन बनाने के लिए पटना के हार्डिंग रोड पर भी निरीक्षण किया। यह आधुनिक कार्यालय जल्द ही बनाया जाएगा।
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