सरकार ने मान लिया कि भोपाल के केरवा-कलियासोत में 96 अवैध निर्माण हैं, जो ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन में बने स्कूल और रेस्टोरेंट’ हैं।

NGT Bhopal news : भोपाल के केरवा और कलियासोत जलाशयों को बचाने के लिए सरकार ने बहुत कुछ किया है। अब यहां 150 हेक्टेयर में बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क का निर्माण 2005 के मास्टर प्लान के तहत किया जाएगा।

भोपाल: अब केरवा और कलियासोत जलाशय अपने पुराने स्वरूप में लौटेंगे, जो शहर की खूबसूरती और पर्यावरण की जान माने जाते हैं। राष्ट्रीय सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया कि इन जलाशयों के आसपास ग्रीन बेल्ट में बहुत कम नियम हैं। अब भोपाल विकास योजना 2005 के लक्ष्यों को छोड़कर यहां बनाए गए निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद अब जमीन की सीमा का निर्धारण शुरू हो गया है।

‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में क्या बनाया गया है?

सरकार ने रिपोर्ट दी कि कुल 96 निर्माण अवैध थे। इनमें से 84 सरकारी जमीन पर हैं, जबकि 12 निजी जमीन पर हैं, जो ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

33 मीटर FTL में बड़ा खतरा जानें

33 मीटर का दायरा जलाशयों के पूरे टैंक लेवल (FTL) से सबसे संवेदनशील है। इस क्षेत्र में केरवा जलाशय में 16 पक्के निर्माण मिले हैं। इनमें से दो सरकारी जमीन पर हैं और राजस्व कोर्ट ने इन्हें हटाने का आदेश दिया है। राजस्व विभाग अब कानूनों के अनुसार 14 अतिरिक्त निजी जमीनों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

बॉटनिकल गार्डन अब बनाया जाएगा

सरकार यहां एक विशाल बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क बनाने की योजना बना रही है, जो 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। टीएंडसीपी विभाग ने इसके लिए एक मैप बनाया है। अब हर इंच जमीन का हिसाब साफ हो गया है, क्योंकि खसरा रिकॉर्ड को मास्टर प्लान के मैप पर विस्तार दिया गया है। कलेक्टर भोपाल को राजस्व विभाग से जल्द से जल्द बाउंड्री बनाकर इसे सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है।

इससे पहले क्या हुआ?

13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में एक निर्णायक बैठक हुई। बाद में 28 फरवरी 2026 को प्रशासन ने 69 में से 28 अवैध निर्माणों को गिरा दिया। जबकि अतिक्रमण करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ बेदखली वारंट जारी किए गए हैं।

क्यों यह कार्रवाई आवश्यक है?

केरवा और कलियासोत भोपाल के जल स्तर को संरक्षित करते हैं, साथ ही वन्यजीवों और बाघों के लिए एक सुरक्षित स्थान हैं। यहां पिछले कुछ वर्षों में होटल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउसों की भरमार हो गई, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा। एनजीटी में दायर एक याचिका के बाद अब पूरा मामला कोर्ट की सीधी निगरानी में है।

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