Delhi High Court ने पद्मजा कुमारी की याचिका को उदयपुर में पूर्व राजपरिवार के संपत्ति विवाद में खारिज कर दिया है। वे संपत्ति पर अधिकार चाहते थे, मृत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को चुनौती देते हुए। इस निर्णय से लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को बहुत राहत मिली है।
उदयपुर: उदयपुर, झीलों की नगरी, के पूर्व राजपरिवार के बीच चल रही अरबों की संपत्ति की कानूनी लड़ाई में फिर एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट ने मेवाड़ के पूर्व महाराज दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की पुत्री पद्मजा कुमारी परमार की याचिका, जिसमें उन्होंने पिता की संपत्ति के लिए ‘प्रशासन पत्र’ की मांग की थी, को खारिज कर दिया है। इस मामले में जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के पक्ष को बड़ी राहत दी है।

पद्मजा कुमारी का दावा क्या था जाने?
विवाद अरविंद सिंह मेवाड़ के 16 मार्च 2025 को निधन से जुड़ा है। कोर्ट में पद्मजा कुमारी ने कहा कि उनके पिता ने बिना वसीयत के मर गए, इसलिए भाई-बहन को पूरी संपत्ति पर समान अधिकार होना चाहिए। उन्होंने सिटी पैलेस और प्रसिद्ध HRH होटल्स ग्रुप सहित अन्य संपत्तियों को संभालने के लिए एक अतिरिक्त प्रशासक नियुक्त करने की मांग की।
कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
सुनवाई के दौरान पता चला कि अरविंद सिंह मेवाड़ ने फरवरी 2025 में अपने निधन से ठीक एक महीने पहले एक वसीयत लिखी थी। इस वसीयत में उन्होंने अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को अपनी स्व-अर्जित संपत्ति का एकमात्र वारिस घोषित किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि वसीयत के साथ “लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन” दाखिल करने के बाद मुकदमे का कोई आधार नहीं रहता। अदालत ने कहा कि अंतरिम प्रशासक की जरूरत नहीं है जब तक वसीयत अवैध नहीं हो जाती।
सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद मामला दिल्ली तक पहुंचा
यह बहस बहुत जटिल रही है। लक्ष्यराज सिंह ने पहले राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की, फिर पद्मजा कुमारी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में वसीयत को चुनौती दी। दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने विरोधाभासी मामलों को अलग-अलग अदालतों में चलते देखा और सभी मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
4 मई पर अब भी निगाहें
वर्तमान याचिका खारिज होने के बावजूद, कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। 4 मई को मामले की अगली सुनवाई में वसीयत की वैधता सहित अन्य मुद्दों पर बहस जारी रहेगी। मेवाड़ के इस ‘रॉयल वॉर’ ने राजस्थान और पूरे देश के विधि विशेषज्ञों का ध्यान खींचा क्योंकि इसमें विरासत, वसीयत और कॉरपोरेट संपत्ति के मालिकाना हक के महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
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