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अधिकतम नोइड: सत्येंद्र कुमार भसीन, वेनिस मॉल का मालिक, पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जेल में डाला गया

Montu Bhasin गिरफ्तार: ग्रेटर नोएडा में स्थित वेनिस मॉल का मालिक, सत्येंद्र कुमार उर्फ मोंटू भसीन, नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह भाग रहा था।

ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश के ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक सतेंद्र भसीन (मोंटू भसीन) को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को मोंटू भसीन को बीटा-2 थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे चौबीस दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। 2015 में एक धोखाधड़ी के मामले में यह गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लंबे समय से जांच चल रही है। वह बार-बार कोर्ट में हाजिर नहीं होता था, हालांकि अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसलिए पुलिस ने उसकी तलाश की।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आदेश दि गईं हैं

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि भसीन की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी थी, इसलिए उसे एक हफ्ते का समय दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट रूप से कहा कि तय समय पर आत्मसमर्पण नहीं करने पर उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेगी। 8 अप्रैल को समय बढ़ाने की अर्जी खारिज होने के बाद भी आरोपी ने न तो सरेंडर किया और न ही अदालत का आदेश मान लिया।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने केस को टालने के लिए कई कानूनों का उपयोग किया। भी अदालत से अपने खिलाफ दर्ज कई एफआईआर की सूचना छिपाई। उसके खिलाफ इसके बाद कठोर कार्रवाई की गई है।

निवेशकों के साथ किया गया हेरफेर

ग्रैंड वेनिस प्रोजेक्ट के निवेशकों ने उन पर धोखाधड़ी, आवंटन में गड़बड़ियों और धन का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित चौहान ने पुलिस रिमांड का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि मामला लगभग दस साल पुराना है और पहले ही जांच की गई है। उन्हें बताया गया कि 2019 में मुख्य चार्जशीट पहले से ही उपलब्ध हैं, और 2022 और 2025 में पूरक चार्जशीट भी उपलब्ध होंगे। अदालत के पास सभी सबूत हैं, इसलिए

बचाव पक्ष ने कहा कि पुलिस रिमांड की मांग बेकार और कानूनी तौर पर गलत है जब कोई शेष बरामदगी नहीं बची। बचाव पक्ष ने 2019 में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम सुरक्षा और लगभग 50 करोड़ रुपये जमा करने का भी उल्लेख किया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को चौबीस दिन की न्यायिक हिरासत में डाल दिया।

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