Pallavi Patel UP चुनाव 2027: विभिन्न राजनीतिक दलों ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। ऐसे में पल्लवी पटेल की राजनीति चर्चा का विषय बन गई है।
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की सिराथू से समाजवादी पार्टी की विधायक पल्लवी पटेल का रुख लगातार बदलता दिखता है। वह यूपी विधानसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करते समय भारतीय जनता पार्टी पर आक्रामक दिखी। वे मणिपुर से लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह तक पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करती दिखीं। हालाँकि, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी पिछले कुछ समय से उनके निशाने पर रहे हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या पल्लवी पटेल समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का साथ छोड़ देंगी, या नहीं, यूपी चुनाव 2027 से पहले? इस पर बहुत कुछ कहा जाता है।

केशव मौर्य को पराजित किया गया
यूपी भाजपा के नंबर दो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को 2022 में सिराथू विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में पल्लवी पटेल ने हराया। कमेरावादी पार्टी की नेता पल्लवी पटेल हैं। सपा और अपना दल कमेरावादी ने 2022 के यूपी चुनाव में गठबंधन बनाया था। इस गठबंधन में कमेरावादी को सपा ने कोई सीट नहीं दी, लेकिन पार्टी के नेताओं को सपा के सिंबल पर चुनावी मैदान में उतारा गया। ऐसे में पल्लवी को विधानसभा में सपा विधायक के रूप में ही देखा जाता है, भले ही वे अपने दल (के) की नेता हों।
अलग तरह कि पहचान बनाने के प्रयास
पल्लवी पटेल ने लगातार उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। समाजवादी पार्टी विधायक को अपने दल का नेता बनाने की कोशिश सदन में सफल नहीं हुई। सपा नेताओं को सदन में बहस करने में समय निकालना पड़ा। ऐसे में वे सदन के बाहर बयान देते रहे हैं और प्रदर्शन करते रहे हैं।
साथ ही, अपने दल (के) नेता ने देखा है कि कांग्रेस, जनसत्ता पार्टी और बसपा को दो सीटों के साथ महत्वपूर्ण बहस में अपनी बात रखने का समय भी मिलता है। इससे पार्टी खुली रहती है। ऐसी सुविधा अपने समूह को नहीं मिल सकती। यही कारण है कि पल्लवी पटेल 2027 में गठबंधन के तहत यूपी चुनावों में पार्टी उम्मीदवार बनने की मांग कर सकती हैं।
दूसरा रास्ता चुना गया है
पल्लवी पटेल ने अपना अलग रास्ता चुना है। वे स्वामी प्रसाद मौर्य और असदुद्दीन ओवैसी के साथ लोकसभा चुनाव 2024 में दिखाई दीं। बाद में अपना अलग रास्ता बनाने की कोशिश भी की। उन्होंने उस स्तर पर सफलता हासिल नहीं की। वहीं, उनकी बहन अनुप्रिया पटेल ने अपना दल (एस) को अलग दर्जा दिलाने में सफलता हासिल की है। यही कारण है कि अखिलेश यादव की रणनीति यूपी चुनाव के दौरान प्रभावित हो सकती है।
विधानसभा में BJP पर जोरदार हुआ हमला
महिला आरक्षण के मुद्दे पर गुरुवार को यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में पल्लवी पटेल ने भाजपा पर कड़ा हमला बोला। भाजपा विधायक ने कहा कि भाजपा सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। शायद जनसंख्या और परिसीमन जैसे मुद्दों को जोड़ने के लिए वह आरक्षण, जो लैंगिक बाध्यताओं को छेद देता है, लंबित किया गया था। महिला आरक्षण को लेकर पल्लवी पटेल ने कहा कि इसी देश में महिला पहलवान सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे।
विधायक ने कहा कि इसी देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ने से कर्मचारी अपने इलाकों से भाग रहे हैं। प्रधान सेवक इस पर चुप है। वह कहीं फोटोग्राफी कर रहे हैं तो कहीं झालमुड़ी खा रहे हैं। बच्चों के साथ फुटबॉल खेलते हुए यह कैसा प्रधानमंत्री है, जिसकी पॉलिटिकल पिकनिक अभी भी जारी है। इन बयानों को लेकर उनकी विभिन्न रणनीतियां चर्चा में हैं।