उदयपुर में देश-विदेश से आए 51 दिव्यांग जोड़ों का ‘महा-विवाह’, नारायण सेवा संस्थान में

रविवार को नारायण सेवा संस्थान में होने वाले 45वें सामूहिक विवाह समारोह में 51 दिव्यांग और निर्धन जोड़े हमसफर बनेंगे। उदयपुर के ‘सेवा महातीर्थ’ में आयोजित इस उत्सव में 700 मेहमान देश-विदेश से आए हैं। संस्थान ने हल्दी-मेहंदी की रस्मों के दौरान सभी जोड़ों को मुफ्त घरेलू सामान भी प्रदान किया है, ताकि वे स्वतंत्र जीवन शुरू कर सकें।

उदयपुर: रविवार को झीलों की नगरी उदयपुर में एक बार फिर प्रेम और मानवता की अनूठी मिसाल दिखाई दी। नारायण सेवा संस्थान ने 45वें भव्य सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया। संस्थान के ‘सेवा महातीर्थ’ में आयोजित इस पुनीत कार्य में 51 दिव्यांग और गरीब जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगे। 700 से अधिक अतिथि सात समंदर पार से लेकर देश के हर कोने से उदयपुर पहुंचे हैं, ताकि इस भावनात्मक और पावन घटना का साक्षी बन सकें।

हल्दी और मेहंदी से सजा हुआ ‘सेवा महातीर्थ’

शनिवार को ही विवाह की रस्में परंपरागत उत्साह से शुरू हुईं। परिसर में मंगल गीत बजते रहे। हल्दी की रस्म में जोड़ों के चेहरों पर आने वाली मुस्कान ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। दिव्यांग जोड़ों के साथ शाम को महिला संगीत कार्यक्रम में देश-विदेश से आए मेहमानों ने जमकर नृत्य किया। मेहंदी की महक और ढोलक की थाप ने पूरे स्थान को उत्सवमय बना दिया।

निशुल्क विवाह और घरेलू जीवन का ‘सम्मान

समारोह को अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, सह-संस्थापिका कमला देवी अग्रवाल और संस्थापक पद्मश्री कैलाश अग्रवाल ने संभाला। यह विवाह संस्थान द्वारा बिना किसी अतिरिक्त खर्च के संपन्न किया जा रहा है। प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि संस्थान का लक्ष्य केवल विवाह कराना नहीं है, बल्कि इन जोड़ों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। विवाह के बाद, संस्थान प्रत्येक जोड़े को घरेलू उपयोग का सामान (जैसे अलमारी, गैस चूल्हा, बर्तन, बिस्तर आदि) उपहार के रूप में देता है, ताकि वे किसी पर बोझ बनने के बजाय खुद को स्वतंत्र और सम्मानित बना सकें।

विश्वव्यापी मानव मंच

इस समारोह में भाग लेने वाले मेहमानों में बड़ी संख्या में विदेशी सैलानियों और प्रवासियों की थी, जो इसे खास बनाया। भारतीय संस्कृति का यह ‘परोपकारी रूप’ उनके लिए अभिभूत हुआ। रविवार को भव्य बिंदौली (बारात) होगी, जिसके बाद ये 51 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर हाथ थामेंगे। अब तक संस्था ने हजारों दिव्यांगों के लिए घर बनाए हैं, और यह 45वां अध्याय भी सफलता की नई इबारत लिखता है।

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