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शरीर ढल गई मगर जीवन संगनी कि तालाश कम ना हुईं, जीवन साथी मिल जाए इसी उम्मीद में 115 भीलवाड़ा तक पहुंचा, अंत में हुआ सफल 7 जोड़ो कि बन गई बात

क्या झुर्रियों और सफेद बालों में भी इश्क चल सकता है? ऐसा ही कुछ भीलवाड़ा में हुआ था। 50 से 80 की उम्र के 115 बुजुर्गों ने एक छत के नीचे एकत्रित होकर अकेलेपन की जंजीरें तोड़ने का एकमात्र लक्ष्य रखा। तीस महिलाओं ने भी इसमें हिम्मत दिखाई, समाज की परवाह किए बिना।

भीलवाड़ा: साथ और प्यार की कोई उम्र नहीं होती, कहते हैं। इस बात को भीलवाड़ा के नागौरी गार्डन में माहेश्वरी भवन में आयोजित एक विशिष्ट ‘जीवनसाथी परिचय सम्मेलन’ ने साबित किया। यहां 50 साल की उम्र पार कर चुके 115 बुजुर्गों ने उम्मीद की कि ढलती उम्र की दहलीज पर उन्हें कोई कंधा मिल जाएगा, जिस पर सिर रखकर वे सुकून की दो चीजें कर सकेंगे। अकेलेपन के अंधेरे को दूर करने के लिए आयोजित इस सम्मेलन में कई चेहरे मुस्कुरा रहे थे।

जाति-धर्म की सीमाएं टूट गईं, शांत रुप से मिल जाए

गुजरात के अहमदाबाद में स्थित “अनुबंध फाउंडेशन” ने इस 95वें सम्मेलन को आयोजित किया, जिसकी सबसे बड़ी खूबसूरती इसके सरल और खुले विचार थे। जाति या धर्म का कोई बंधन नहीं था। 50 से 80 वर्ष के अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा लोगों ने भाग लिया था। दिल्ली, जयपुर, कोटा, बीकानेर, अहमदाबाद और दिल्ली से 80 से अधिक पुरुषों और 30 साहसी महिलाओं ने नामांकन कराया।

भूकंप त्रासदी लेकर आया सुकून का रास्ता

संस्था के अध्यक्ष नट्टू भाई पटेल ने इस कार्रवाई को भावुक बताया। उन्होंने कहा कि 2001 के गुजरात भूकंप ने कई घरों को नष्ट कर दिया था। तब उन्होंने सोचा कि बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन अकेलापन एक बड़ी सजा है कि जो बुजुर्ग अपने जीवनसाथी खो देते हैं। अब तक, उन्होंने इस विचार से 94 सफल आयोजन देश भर में किए हैं और 225 से अधिक जोड़ों की शादियां करवा चुके हैं।

महिलाओं को साहस का सन्देश दी गईं

कार्यक्रम में किन्नरी लखाणी, संस्था की सचिव, ने कहा कि आज भी महिलाएं सामाजिक दबाव से अपनी इच्छाओं को दबा लेती हैं। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे अकेलेपन से घबराने के बजाय खुद को खुश करने का फैसला करें। दिल्ली से आईं सुमन चौधरी और पंजाब के डॉ. दिलबाग राय भाटिया ने भी कहा कि भावनात्मक सहारा केवल एक जीवनसाथी ही दे सकता है, भले ही सभी सुविधाएं उपलब्ध हों।

नवीन शुरूआत: जोड़ों के बारे में 7 बातें

आयोजन में भाग लेने वालों के लिए भोजन की व्यवस्था थी और वे नि:शुल्क रह सकते थे। 5 से 7 नए जोड़े इस सम्मेलन के अंत तक बनने की संभावना है। यहां बनने वाले जोड़े भी संस्था द्वारा विधिवत विवाह करेंगे।

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