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मेरठ केंद्रीय बाजार विवाद: को लेकर हिंदूवादी नेता और सपा पार्टी के नेता दोनों पर जमकर विरोध किया, तब महिलाओ ने बोलने से रोका, फिर वहा से जानें पर मजबूर कर दिया

मध्यम बाजार में हो रहे प्रदर्शन: मेरठ के शास्त्रीनगर के केंद्रीय बाजार में लगातार एक के बाद एक धरना किया जा रहा। हिंदूवादी और सपा नेताओं को धरना स्थल पर बोलने से रोक दिया और वे वहा से वापस चला गया

मेरठ: सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ में शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों और उनके परिवारों ने सोमवार को भी धरना दिया। महिलाएं धरना स्थल पर पूरी तरह से मोर्चा संभालती हैं, जहां लगातार विरोध और नाराजगी देखने को मिलती है।

धरना स्थल पर पहुंचे नेताओं ने विरोध प्रकट किया

शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में धरना स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। धरनास्थल पर समाजवादी पार्टी के मुखिया गुर्जर, प्रदेश सचिव विपिन चौधरी और जिला पंचायत सदस्य हिमांशु सिद्धार्थ ने बोलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें महिलाओं ने रोक दिया।

महिलाओं के प्रति कठोर रुख के कारण सपा नेताओं को बिना भाषण देने के वापस लौटना पड़ा।

महिलाओं ने स्पष्ट रूप से संदेश दिया गया

धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपनी लड़ाई अकेले लड़ेंगी, न कि किसी राजनीतिक मंच पर। हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही भी धरने पर आए, लेकिन उन्हें बोलने से भी रोका गया और वे वापस चले गए।

महिलाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप को नकार देंगे।

सपा के नेता ने क्या आरोप लगाया गया

सपा नेता मुखिया गुर्जर ने दावा किया कि धरने को राजनीतिक रूप से नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ पीड़ितों की आवाज उठाना चाहते थे और व्यापारियों के समर्थन में आए थे, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया।

सपा नेता का क्या प्रदर्शन जानें

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मेरठ कमिश्नरी चौराहे पर भी धरना दिया और इस मामले से जुड़े अन्य मुद्दों पर प्रदर्शन किया। सपा नेताओं का आरोप है कि सेंट्रल मार्केट धरने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर को जानबूझकर खाद्य पैकेटों पर फाड़ा गया था।

राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ, कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।

पुलिस तैनात, परिस्थितियों को देखते हुए

धरना और प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया था ताकि कोई अप्रिय घटना नहीं होती थी। फिर भी, प्रशासन पूरे मामले पर नज़र रखता है, हालांकि हालात संवेदनशील हैं, और स्थिति शांत है।

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