2024 के बाद, महिला वोटर्स ने भारतीय राजनीति का समीकरण पूरी तरह से बदल दिया; अब वे सिर्फ भागीदार नहीं बल्कि सत्ता का निर्णायक “किंगमेकर” हैं।
नई दिल्ली: भारतीय महिलाएं देश के लोकतंत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखती हैं। 2024 के बाद होने वाले चुनावों में “आधी आबादी” का उदय और सत्ता के लिए लड़ाई भी होगी। अब महिला मतदाता आम लोगों में से नहीं हैं, बल्कि सत्ता निर्णायक करने वाली सबसे बड़ी शक्ति बन चुकी हैं। अब हर जगह, चुनावी रैलियों से लेकर घोषणापत्रों तक, एक ही प्रश्न उठता है: “महिलाएं किसके साथ हैं?”सत्ता का मूल प्रश्न आज भी वही है।

अब हर राजनीतिक दल का चुनावी घोषणापत्र “आधी आबादी” को अपनाकर एक “किंगमेकर” बन गया है, जो सिर्फ चुनाव प्रचार का एक हिस्सा नहीं है। 2024 के पहले चुनावों में राजनीतिक दल केवल युवा मतदाताओं को लक्षित करके घोषणापत्र बनाते थे। 2024 से, राजनीतिक पार्टियों ने युवाओं और महिलाओं को भी महत्व दिया है। महिलाओं पर केंद्रित कई योजनाओं ने प्रत्येक चुनाव में महिला से की संख्या बढ़ा दी।
- हाल ही में चुनाव आयोग और एसबीआई रिसर्च विभाग ने जारी किए गए प्रामाणिक आंकड़े बताते हैं कि महिला वोटरों की भागीदारी सबसे अधिक है और सरकार की “महिला-केंद्रित” कल्याणकारी योजनाओं का सबसे अधिक प्रभाव है।
- 2024 के लोकसभा चुनावों में महिला मतदाताओं का टर्नआउट 65.78 प्रतिशत था, जो पुरुष मतदाताओं से अधिक था। इस चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी संख्या में लगभग 31.2 करोड़ महिलाओं ने मतदान किया।
- लोकसभा नहीं इस लहर का लक्ष्य था। 2024 के अंत में हुए विधानसभा चुनावों में यह रुझान और भी मजबूत हुआ। झारखंड विधानसभा चुनाव (2024) में पहले चरण में ही 64.27 प्रतिशत पुरुषों और 69 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया, चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार। 43 सीटों में से 37 में पुरुषों का कम टर्नआउट था।
- महाराष्ट्र और हरियाणा में भी महिलाओं ने अधिक हिस्सा लिया। महिलाओं के लिए सीधी नकद हस्तांतरण योजनाओं के लागू होने से महिलाओं का मतदान प्रतिशत अविश्वसनीय रूप से बढ़ा है।
महिलाओं ने बिहार में भी रिकॉर्डतोड़ वोटिंग की
2025 के अंत में बिहार विधानसभा चुनावों में भी यही रुझान देखा गया था। बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ भी यहां कामयाब रही है। इस योजना के तहत नौकरी की शुरुआत करने के लिए 10 लाख रुपये की सहायता दी गई। कुछ मामलों में बेहतर प्रदर्शन पर दो लाख रुपये की सहायता दी जा सकती है। इससे बिहार में भी महिलाओं ने रिकॉर्डतोड़ वोटिंग कीl।
महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6 था, जबकि पुरुषों का 62.8 था। पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने मतदान करीब 9 प्रतिशत अधिक किया था। 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों में अब यही ट्रेंड देखने को मिलेगा। यह असम, केरल या पुडुचेरी के चुनाव से संबंधित है। हर जगह पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की भागीदारी अधिक है।
- 2019 के मुकाबले 2024 और उसके बाद के चुनावों में महिलाओं के मतदान प्रतिशत में भारी वृद्धि कोई संयोग नहीं है, एसबीआई की जनवरी 2025 की एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार। जमीनी स्तर पर काम करने वाली सरकारी योजनाएं इसके पीछे हैं।
- महाराष्ट्र में ‘माझी लड़की बहिण योजना‘ और झारखंड में ‘मंईयां सम्मान योजना’ जैसी योजनाओं ने महिलाओं को सीधे धन दिया है। जब महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता मिलती है, बिना किसी बिचौलिए या परिवार के किसी पुरुष सदस्य पर निर्भर हुए, वे वोट देने के लिए अधिक प्रेरित होती हैं।
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों का मालिकाना हक मिलने वाली महिलाओं का बड़ा हिस्सा बढ़ी हुई महिला वोटिंग में शामिल है। महिलाओं ने संपत्ति पर नाम होने से सामाजिक सुरक्षा और सशक्तीकरण की भावना विकसित की है।
- महिलाओं के जीवन में रोजमर्रा की सबसे बड़ी चुनौतियों को कम करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय और ‘हर घर जल’ योजना बनाई गई हैं। घर में बिजली और नलकूपों की उपलब्धता ने महिलाओं का जीवन स्तर सुधारा है, जिसका सीधा असर पोलिंग बूथ पर उनके बढ़े हुए टर्नआउट पर है।
- लाखों महिलाएं मुद्रा योजना के तहत आसानी से लोन मिलने और स्वयं सहायता समूहों की शक्ति से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुई हैं। इसी श्रेणी में लगभग 36 लाख महिला वोटर भी शामिल हैं।
“जेंडर पॉलिटिक्स” का प्रभाव
इस सूचना ने राजनीतिक दलों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब चुनावों में जाति या धर्म के पुराने समीकरणों से नहीं बल्कि ‘जेंडर राजनीति’ से जीत मिलेगी। अब हर पार्टी जानती है कि महिला वोटर स्वतंत्र वोट हैं। अब वे अपने पति या पिता के कहने पर वोट नहीं देतीं, बल्कि उस पार्टी को चुनती हैं जो उनकी सुरक्षा, सम्मान और रसोई के बजट पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
- 2024 और उसके बाद के चुनाव स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि भारतीय लोकतंत्र में अब महिलाओं को ध्यान में रखकर ही नीतियां बनाई जाएंगी।
- महिला आरक्षण बिल, जो आने वाले समय में संसद में पेश किया जाएगा, इसका एक नवीनतम उदाहरण है। इसके तहत महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।
- उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने वाली सरकारी नीतियों ने उन्हें भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत और प्रभावी आवाज बनाया है।