बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक 90 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर की याचिका पर जवाब मांगा है। डॉक्टर चाहते हैं कि वह अपने पुराने चिकित्सक को अपने बेटे की तरह स्वीकार करे। याचिकाकर्ता, मुंबई के ओपेरा हाउस क्षेत्र से रिटायर्ड स्त्री रोग विशेषज्ञ बोम्सी वाडिया हैं।
मुम्बई: कानून अडॉप्शन को आड़े आया, इसलिए मामला हाई कोर्ट पहुंचा। याचिका 2025 में दायर की गई थी। अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को प्रतिक्रिया देने का आदेश दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोनों सरकारों से कुछ सवाल पूछे हैं। बोम्सी वाडिया, एक रिटायर्ड प्रोफेसर और स्त्री रोग विशेषज्ञ, जो अपने 43 वर्षीय केयरटेकर राजीव झा को अपने बेटे के रूप में लेना चाहते हैं, ने यह याचिका दायर की है।

ओपेरा हाउस में बोम्सी वाडिया रहते हैं। यहां उनका बड़ा बंगला है। इसके अतिरिक्त, वे कई संपत्ति रखते हैं। यह BMW की कार है। बॉम्बे हाई कोर्ट से उनका अनुरोध था कि वह गोद लेने के दस्तावेज़ को रजिस्टर करने का आदेश दे। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को किसी वयस्क व्यक्ति को गोद लेने का अधिकार देना चाहिए, जिसके साथ वे लंबे समय से संबंध रखते हैं।
बोम्सी ने विवाह नहीं किया
वह माननीय चिकित्सक हैं और मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं, बोम्सी के वकील सुरेश माने ने बताया। वाडिया ने कभी शादी नहीं की थी। उनके कोई बच्चे नहीं हैं और वे अकेले रहते आ रहे हैं। उनकी बहन भी मर चुकी है। उनकी बहन को एक बेटा और दो बेटियां हैं।
राजीव झा हिन्दू धर्म के इंसान हैं
राजीव झा, जो हिंदू हैं, 1999 से वाडिया के साथ रह रहे हैं। बोम्सी वाडिया की देखभाल राजीव करते हैं। उन्हें बताया गया कि बोम्सी अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर किसी वयस्क व्यक्ति को अपने बेटे के रूप में गोद लेना चाहते हैं, ताकि उनका नाम और प्रशंसा बढ़े। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों में वयस्कों को गोद लेने का कोई प्रावधान नहीं है और वे मुख्य रूप से बच्चों पर केंद्रित हैं।
गोद लेने की आवश्यकता पर कोर्ट ने सवाल उठाया
सुनवाई में जजों ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया: यह स्वीकार करने की जरूरत क्यों है जब वाडिया ने झा के भविष्य को बचाने के लिए पहले ही कार्रवाई की है?वाडिया: झा का पक्ष लिया गया है। उनकी प्रेरणा अटॉर्नी है। जरुरी रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। बेंच ने पूछा कि राजीव झा के अपहरण के बाद वाडिया कानूनी रूप से वाडिया बन जाएगा या नहीं। जवाब में अधिवक्ता ने कहा कि सभी वाडिया परिवार में स्थानांतरित होने के लिए सहमत हैं और झा शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे हैं।
रजिस्ट्रार की अस्वीकृति से कानूनी लड़ाई की शुरुआत
अगस्त 2025 में, रजिस्ट्रार ने गोद लेने का दस्तावेज़ रजिस्टर करने से इनकार कर दिया, जिससे मामला अदालत में आया। रजिस्ट्रार को गोद लेने की प्रक्रिया स्वीकार करने का आदेश देने के लिए वाडिया ने अदालत से दखल देने की गुहार लगाई। पसंद करने वाले किसी वयस्क को गोद लेने का उनका अधिकार मान लिया जाए।
संपत्ति का मुद्दा राज्य सरकार ने उठाया। वाडिया की संपत्ति को लेकर राज्य सरकार के वकील ने भी चिंता व्यक्त की। उनकी वसीयत में वाडिया की कई संपत्ति का उल्लेख है, उन्होंने कहा। उनका सुझाव था कि इस तरह की गोद लेने की अनुमति देने से पहले कानूनी स्पष्टता होनी चाहिए। वाडिया के वकील ने इसके जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी संपत्ति को बेचने का अधिकार है।