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मेरठ: सेंट्रल बाजार में हंगामे शुरु हो गया फिर भी  सीलिंग की कार्रवाई शुरू, व्यापारी पुलिस से भिड़े, कल बंद करने का निर्णय लिया पूरा पढ़िए

Meerut का प्रमुख बाजार खुला: मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चौदह अवैध निर्माणों को सील करने की कार्रवाई शुरू होते ही हंगामा हो जाय

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार को हड़कंप मचने लग गया, जब आवास विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 44 अवैध व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई शुरू की। व्यापारियों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शुरू हुई इस कार्रवाई का तीव्र विरोध किया, जिससे मौके पर तनाव फैल गया।

बहुत अधिक पुलिस बल की तैनाती किया गया वहा पर

सेंट्रल मार्केट में सीलिंग की कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क था। सेंट्रल मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों थानों, पीएसी और दमकल विभाग की गाड़ियां तैनात की गईं। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग लगाई गई थी ताकि अव्यवस्था को रोका जा सके।

सीलिंग कार्य की शुरुआत सुधा अस्पताल से हुई, फिर अन्य चिन्हित इमारतों पर भी काम किया गया।

व्यापारियों ने किया विरोध और फिर हुआ पुलिस से झगड़ा

व्यापारी सड़क पर उतर आए और आवास विकास परिषद की टीम का घेराव किया, क्योंकि वे सीलिंग की कार्रवाई से नाराज थे। इस दौरान व्यापारियों और पुलिस के बीच भी संघर्ष हुआ। व्यापारी कहते हैं कि बिना समाधान के सीलिंग की कार्रवाई गलत है क्योंकि उन्होंने पहले ही लगभग 70 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। उनकी मांग थी कि उनकी जमा राशि को पहले वापस दिया जाए।

एडीएम सिटी ने सपा नेता को पीटा

सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने के लिए समाजवादी पार्टी के नेता जीतू नागपाल भी मौके पर पहुंचे। एडीएम सिटी बृजेश सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे राजनीतिक भाषण नहीं करेंगे। उनका कहना था कि अगर कोई राजनीति करना चाहता है तो घर जाकर करे, अगर नहीं तो जेल भेज दूंगा। जवाब में नागपाल ने कहा कि वह भी एक व्यापारी हैं और व्यापारियों के हित में ही बोल रहे हैं।

30 अप्रैल तक की मांग किया गया

मेरठ मंडल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता ने 30 अप्रैल तक का समय प्रशासन से मांगा है। वे कहते हैं कि वे नियमों का पालन करने को तैयार हैं और आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए हैं, लेकिन कारोबार समेटने के लिए पर्याप्त समय चाहिए।

वहीं, एडीएम सिटी ने बताया कि व्यापारियों द्वारा दिए गए धन का उद्देश्य भू-उपयोग परिवर्तन था। यदि कोई पैसा वापस चाहता है तो लिखित आवेदन कर सकता है, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह पूरी कार्रवाई चल रही है, इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता।

बाजार में अफरा-तफरी, सामान को रातों-रात हटाया गया हैं

सेंट्रल मार्केट में सोमवार शाम से शोर था। रातों-रात बहुत से दुकानदारों ने अपनी दुकानों से महंगी चीजें ट्रकों में भरकर सुरक्षित स्थानों पर भेजीं। प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए कुछ व्यापारी खुद अपने अवैध निर्माणों को गिरा देते दिखे। व्यापारियों ने मंगलवार को विरोध प्रकट करते हुए पूरा बाजार बंद कर दिया और आगे की योजना बनाई गई।

अस्पतालों में मरीजों की शिफ्ट

छह अस्पताल और छह स्कूल भी सीलिंग के अधीन हैं। सोमवार देर रात से ही मरीजों को अस्पतालों से अन्य स्थानों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया गया था, क्योंकि संभावित कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया जा सकता था। मंगलवार सुबह तक, लगभग ४२ मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। वहीं, एक स्कूल में हाफ-डे घोषित करना पड़ा, जबकि कई स्कूलों में बच्चों को ताला लगा दिया गया था। इस दौरान स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच झगड़ा भी हुआ।

गुरुवार को मेरठ में बंद की घोषणा

संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों, नवीन गुप्ता और अजय गुप्ता, सीलिंग की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। गुरुवार को मेरठ में करीब 665 व्यापारिक संघों ने शहर को बंद करने की घोषणा की है। व्यापारियों का कहना है कि यह केवल 44 इमारतों का मामला नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की जीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

प्रशासन सतर्क और परिस्थितियों को देखता है

फिलहाल, सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सेंट्रल मार्किट में व्यापारी फिलहाल धरनारत हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था को बचाने के लिए हर हाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।

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