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डीएसपी तंजील अहमद की हत्या: हाई कोर्ट ने आरोपी रेयान को फांसी की सजा सुनाई, पूरी घटना पढ़ें

हत्याकांड (DSP Tanzil Ahmed): DGP तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में फंसे आरोपी रेयान को जेल से बाहर कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर के स्योहारा में डीएसपी तंजील अहदम और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में आरोपी रेयान को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। रेयान के परिजनों की अपील पर सुनवाई करने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय लिया। दरअसल, निचली अदालत ने रेयान को डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या में फांसी की सजा सुनाई। 2022 में, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत का निर्णय पलट दिया। निचली अदालत का फैसला हाई कोर्ट ने गंभीर त्रुटि माना। कोर्ट ने निर्णय दिया कि अभियोजन पक्ष का मामला संदेहपूर्ण था।

जानिए क्या हैं वो घटना का मामला

2 अप्रैल 2016 की रात बिजनौर के स्योहारा इलाके में एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना को गोली मारकर मार डाला गया। यह हुआ जब वे एक शादी समारोह से वापस आ रहे थे। उस समय, बाइक सवार आतंकवादियों ने उन पर हमला किया। डीएसपी तंजील अहमद को चौबीस गोली मार दी गईं। घटना के बाद तंजील अहमद अस्पताल में भर्ती हुआ।

तंजील अहमद पहले ही मर चुका था। अगले दिन, फरजाना गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में मर गया। तंजील अहमद में उनके शरीर पर 33 घाव पाए गए थे। पूरे क्षेत्र में इस घटना ने सनसनी फैला दी थी। तंजील अहमद का भाई मोहम्मद रागिब ने स्योहारा थाने में शिकायत की।

छह साल बाद निर्णय लिया गया

पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसमें सहसपुर के रहने वाले मुनीर और रेयान को डीएसपी और उनकी पत्नी पर गोली मारने का दोषी ठहराया गया। रिजवान, तंजीम और जैनी भी चार्जशीट पर थे। दोनों आरोपियों को निचली अदालत में सुनवाई के बाद दोषी करार दिया गया। मुनीर और रेयान को हत्या करने के आरोप में अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। तंजीम, जैनी और रिजवान भी मामले में बरी कर दिए गए। मुनीर और रेयान के परिवार ने फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की।

19 नवंबर 2022 को वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल में मुनीर की इन्फेक्शन से मौत हो गई, जब हाई कोर्ट में अपील चल रही थी। मुनीर ने हाई कोर्ट में अपील खारिज कर दी। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया है।

हाई कोर्ट ने तर्क को स्वीकार किया गया

इस दावा को हाई कोर्ट ने मान लिया। कोर्ट ने निर्णय दिया कि गवाहों में संदेह था और अस्पष्टता थी। अभियोजन का पूरा मामला इससे बदतर हो जाता है। 31 मार्च 2026 को, हाई कोर्ट की पीठ ने निर्णय लिया कि निचली अदालत ने फांसी की सजा देने में गंभीर त्रुटि की है। यही कारण था कि रेयान को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया और उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हो।

रेयान के पिता सादात हुसैन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की निर्णय को सकारात्मक बताया। हमारे बेटे को न्याय मिला, उन्होंने कहा। Sadat Husain ने हाई कोर्ट की निर्णय को धैर्य और विश्वास की जीत बताया।

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