Babu Jagjivan Ram की जन्मदिन: बाबू जगजीवन राम ने देश को दो बार प्रधानमंत्री बनाया था। आइए, सबसे लंबे समय तक सांसद रहने वाले नेता को प्रधानमंत्री नहीं बनाने के कारणों को जानते हैं, उनकी जयंती पर।
पटना:आज बाबू जगजीवन राम का जन्मदिन है। उनका जन्म 5 अप्रैल 1908 को बिहार के छोटे से गांव चंदवा में हुआ था। उन्हें उनके काम के कारण लोग प्यार से ‘बाबूजी’ कहते थे। वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने अपने पूरे जीवन को न्याय और समानता के लिए समर्पित किया। विरोधी भी उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता का लोहा करते थे। 1989 तक निरंतर सांसद रहे ‘बाबूजी’ का रिकॉर्ड है।

जब जगजीवन ने “सीक्रेट बैलेट” में जीत हासिल की, लेकिन मधु लिमए ने हार मान ली
यह घटना 1977 की है, जब आपातकाल के बाद जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई। प्रधानमंत्री का पद कौन लेगा? चरण सिंह, मोरारजी देसाई और जगजीवन राम सबसे बड़े दावेदार थे। ऐसे में, इन तीनों में से कौन प्रधानमंत्री बनेगा? इसके लिए जीतने वाले सांसदों से गुप्त बैलेट, या गुप्त मतदान, लिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उस समय बाबू जगजीवन राम को सबसे अधिक सांसदों का समर्थन मिला था। लेकिन, उस समय मधु लिमए, एक प्रसिद्ध समाजवादी नेता, ने विरोध की आवाज उठाई।
मधु लिमए ने कहा कि इंदिरा गांधी की इमेरजेंसी के खिलाफ जनता ने जनादेश दिया है। जिसने संसद में ‘इमरजेंसी’ का प्रस्ताव पेश किया था, ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री कैसे बनाया जाए? यह जनता का अपमान होगा अगर जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनाया गया। तब सभी सांसद मौन कर बैठे।
याद रखें कि जगजीवन राम कांग्रेस पार्टी में थे जब इंदिरा गांधी ने इमेरजेंसी बनाने का फैसला किया था। उन्हीं ने संसद को इमरजेंसी का प्रस्ताव दिया था। बाद में चुनाव से पहले जगजीवन राम ने कांग्रेस छोड़ दी।
जगजीवन राम का रास्ता मधु लिमए की इस जिद से रोका गया। बाद में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बन गए, जबकि जगजीवन राम प्रधानमंत्री बनने से पहले एक कदम पीछे रह गए। ये पांच कहानियां बाबू जगजीवन राम से जुड़ी हैं।
क्या जगजीवन राम नीलम संजीव रेड्डी के निर्णय से प्रधानमंत्री बनने से बच गए?
जीवनराम को दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला। 1979 में, चौधरी चरण सिंह की सरकार गिरने वाली थी, यह मौका आया। जनता पार्टी ने बाबू जगजीवन राम की सरकार बनाने का दावा किया। सांसदों ने उनका पक्ष लिया। इंदिरा गांधी को पता था कि जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनाना मुश्किल होगा।
उधर, तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने लोकसभा को भंग कर चुनाव कराने और जगजीवन राम को बहुमत साबित करने का मौका देने की घोषणा की। 1969 में जगजीवन राम ने नीलम संजीव रेड्डी का साथ दिया, लेकिन एक निर्णय ने उन्हें देश का पहला दलित प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया, जो भारतीय लोकतंत्र की वह विडंबना थी। बता दें कि देश के छठवें राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी थे।