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दिव्यांग जवानों को ट्रेनिंग में पूर्व सैनिक का दर्जा मिलना चाहिए?  सुप्रीम कोर्ट के द्वारा केन्द्र से क्या,क्या सवाल किया हैं पूरा पढ़िए

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या प्रशिक्षण के दौरान घायल या दिव्यांग होकर मेडिकल कारणों से बाहर किए गए विद्यार्थियों को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इससे उन्हें नौकरी में पुनर्वास और आरक्षण मिलेंगे। इस विषय पर केंद्र ने व्यापक उत्तर दिया है।

नई दिल्ली: गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा केंद्र सरकार को सवाल किया कि क्या ट्रेनिंग के दौरान  जो  चोंट लगे या दिव्यांगता कि वजह से बाहर निकाल  गए ,विद्यार्थियों को पूर्व सैनिक का दर्जा  मिलना चाहिए क्या, तब पश्चात अदालत ने कहा कि ऐसा होने पर इन कैडेट्स को सरकारी और अर्ध-सरकारी पदों पर आरक्षण के समान उनको लाभ मिल सकेगा, जो उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण साबित भी होंगे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने कहा कि इनमें से अधिकांश २० से ३० वर्ष की आयु में हैं और उन्हें रोजगार की जरूरत है। पीठ ने कहा कि ऐसे कैडेट्स को भी पूर्व सैनिकों या पूर्व सैन्यकर्मियों की श्रेणी में शामिल करने पर विचार करना चाहिए।

इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी—अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल

मामले पर कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था, इसलिए अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण से कहा कि केंद्र से इस विषय पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी जाएगी।

कैडेट्स की पुनर्वास की संभावना बढ़ेगी

इस निर्णय से प्रशिक्षण के दौरान घायल या दिव्यांग सैनिकों को बहुत फायदा हो सकता है। उन्हें नौकरी में आरक्षण का फायदा मिलेगा अगर उन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा मिलता है, जिससे उनके पास अधिक अवसर होंगे। पुनर्वास या रक्षा सेवाओं से जुड़े डेस्क जॉब के अवसर भी मिल सकते हैं।

713 उम्मीदवारों में से केवल एक ही RPSC पेपर प्रस्तुत कर सकेगा

  • 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को बड़ी राहत देते हुए अपने आदेश को संशोधित किया है। अब अदालत ने केवल एक अभ्यर्थी को ही सब-इंस्पेक्टर पुलिस/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा, जो 5 से 6 अप्रैल, 2025 को होगी, में शामिल होने की अनुमति दी है।
  • शुक्रवार को कोर्ट ने संशोधित आदेश पारित किया। RPSC ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्य नहीं पेश किए गए थे। 2 अप्रैल को, सुरज मल मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसे और 712 अन्य अभ्यर्थियों को प्रोविजनल एडमिट कार्ड देने का आदेश दिया।
  • साथ ही उन्होंने कहा कि इन अभ्यर्थियों के परीक्षा परिणाम तब तक नहीं जारी किए जाएंगे, जब तक राजस्थान हाई कोर्ट के दो लंबित मामलों पर निर्णय नहीं आ जाता। अब केवल सुरज मल मीणा, याचिकाकर्ता, परीक्षा में बैठ सकेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पक्षकार नहीं होने वाले अन्य अभ्यर्थी हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

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