बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं, बल्कि पिता की भी है होती हैं, पैटरनिटी लीव का मुद्दा संसद में उठाया गया पूरा पढ़िए
Raghav Chadha के समाचार: संसद में राघव चड्ढा, एक राज्यसभा सांसद, ने पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने की मांग किया गया हैं। उनका कहना था कि निजी क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश पिता इस अधिकार से किसी तरह से वंचित ना रखा जाए उन्होंने कहा कि पितृत्व अवकाश का कानूनी अधिकार होना चाहिए, स्वीडन और जापान का उदाहरण देते हुए
Raghav Chadha की खबरें: देश में पैटरनिटी लीव या पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार देने की मांग तेजी से बढ़ रही है। संसद में, आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने कहा कि भारत में एक बड़ी सामाजिक और कानूनी कमी है कि सिर्फ मां बच्चे की देखभाल करती है।

राघव चड्ढा ने कहा कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो माता-पिता दोनों को बधाई मिलती है, लेकिन बच्चे की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी मां पर होती है। वे इसे समाज की असफलता बताया। उनका कहना था कि हमारा तंत्र केवल मातृत्व अवकाश (मेटरनिटी लीव) को मान्यता देता है, पिता की भूमिका को अनदेखा करता है।
संसद में उन्होंने कहा कि पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए, ताकि पिता को नौकरी या परिवार के बीच अपने नवजात बच्चे की देखभाल करना न पड़े। राघव चड्ढा ने कहा कि गर्भावस्था के नौ महीनों के बाद एक मां को सिजेरियन या सामान्य डिलीवरी जैसी मुश्किल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे समय में उसे दवाइयों के साथ-साथ अपने पति से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक मदद की बहुत जरूरत होती है।
राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने बताया कि पति के लिए बच्चे की देखभाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि पत्नी की देखभाल भी। अब पति की मौजूदगी एक आवश्यकता है, न कि एक लग्जरी।
पितृत्व अवकाश का ९० दिन जाने
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अलावा निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को फिलहाल 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है, उन्होंने बताया। भारत का लगभग ९० प्रतिशत कर्मचारी निजी क्षेत्र में काम करते हैं, यानी अधिकांश पिता इस सुविधा से वंचित हैं।
राघव चड्ढा ने बताया कि स्वीडन, आइसलैंड और जापान में पितृत्व अवकाश 90 दिनों से 52 हफ्तों तक कानूनी रूप से मिलता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि कानून समाज का आईना होना चाहिए और स्पष्ट दिखना चाहिए कि बच्चे की देखभाल माता-पिता दोनों की भी जिम्मेदारी है।