छत्तीसगढ़ में व्याप्त नक्सलवाद को जड़ से मिटाया जा रहा है। इस पर सुरक्षाबल लगातार काम कर रहे हैं। पिछले साल सैन्य बलों ने पांच सौ से अधिक नक्सलियों को मारा था।

छत्तीसगढ़ से एक महत्वपूर्ण सूचना मिली है। छत्तीसगढ़ पिछले चार दशक से नक्सलवाद का सबसे बड़ा गढ़ रहा है। 1980 के दशक में आंध्र से फैलने वाले इस आतंक ने बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर जैसे जिलों में हिंसा फैलाई। हालाँकि, अब नक्सलवादी हथियार लेकर समाज की मुख्य धारा में शामिल हो रहे हैं। तीन नक्सलियों संगीता कुजाम, संजू और लखमू ने 28 मार्च को प्रतापुर थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। बिना हथियार के वे तीनों आत्मसमर्पण करने पहुंचे। 2025 में सैन्य बलों ने पांच सौ से अधिक नक्सलियों को मारा था। हजारों नक्सलियों ने बंदूकें छोड़ दीं।
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