गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट उद्घाटन के कार्यक्रम हेतू 800 बसे जेवर के लिए चली गईं, जिससे इस बीच स्टूडेंट और घरवाले परेशान होता रहा

Ghaziabad शैक्षणिक बस: जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में गाजियाबाद से 800 बसें गईं। इसकी वजह से विद्यार्थियों को स्कूल में अकेले जाने में कठिनाई हुई।

गाजियाबाद: गाजियाबाद जिले से गई करीब 800 बसों ने नोएडा इंटरनेशनल एवरपोर्ट के उद्घाटन समारोह को भव्य बनाने के जुनून में सबसे ज्यादा नुकसान स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उठाया। उन्हें अपने बच्चों को स्कूल ले जाना और वापस लाना पड़ा।

जबकि वेव सिटी परियोजना से प्रभावित किसानों को उनकी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री से मिलने के लिए जेवर जा रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया, तो पुलिस और किसानों के बीच भारी तनाव पैदा हुआ। बाद में पुलिस अधिकारियों और किसानों के बीच सड़क पर लंबी बहस हुई।

कई विद्यालयों के लिए स्कूल जाने हेतु बस नहीं थी

प्रशासन ने 800 बसों को नोएडा एयरपोर्ट कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और अन्य लोगों के लिए उपलब्ध कराया था। शिक्षा संस्थानों को पहले डीएम ने ऑनलाइन क्लासेज चलाने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में आदेश को निरस्त कर दिया गया। इससे विद्यार्थियों को कई स्कूलों में बस नहीं मिली।

पैरेंट्स ने अपने बच्चों को स्वयं स्कूल लेजाकर छोड़ा

यह दिखाई देता है कि बच्चों को अपने पैरेंट्स खुद स्कूल ले जाते हैं और वापस लाते हैं। विजयनगर एरिया की निधि ने कहा कि स्कूल मैनेजमेंट ने बस यह जानकारी दी थी कि कोई नहीं आया था। वह स्कूल से अपनी बेटी को ले आईं। सेक्टर-9 में दोवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक विद्यार्थी की मां बबिता ने बताया कि उसकी बेटी ने स्कूल छोड़ दिया।

वेव शहर के किसानों ने विरोध प्रकट किया

वेव सिटी परियोजना में जमीन देने वाले किसानों ने कहा कि लंबे समय से शिकायत करने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई है और उनके साथ अन्याय हुआ है। इसलिए वे देश के वरिष्ठ नेतृत्व से अनुरोध करेंगे।

कई कृषक घरों के मालिक बन गए

किसान अजयपाल सिंह और भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद चौधरी को मधुबन बापूधाम क्षेत्र में कैद कर लिया गया था। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कार्यक्रम में भाग लेना उसकी इच्छा थी। उनका दावा था कि उन्होंने बेरोजगार युवा लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए समय मांगा था, लेकिन समय नहीं मिला। प्रधानमंत्री के नाम पर एसीपी सूर्यबलि मौर्य को ज्ञापन सौंपा गया।

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