सीएपीएफ बिल पर बहुत ज्यादा विरोध हुआ, इनके बावजूद भी सरकार ने राज्यसभा में पेश किया गया पूरा पढ़िए

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्यसभा में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस बिल पेश किया, जिसका बहुत विरोध हुआ। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस बिल को पेश पटल पर रखा, जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जगह था।

नई दिल्ली: सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में ‘सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल, 2026′ पेश किया, जिसे विपक्ष ने विरोध किया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे अमित शाह की जगह पेश किया। AAPWA, या ‘अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन’, मामले में सीएपीएफ में कैडर अधिकारियों के समय से प्रमोशन और आईपीएस को तरजीह ना देने के विरोध में है. 28 मार्च को इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।

AAPWA की बैठक में निर्णय लिया जायेगा

इस दिन संघ की कोर कमिटी की बैठक होनी है। उसमें निर्णय लिया जाएगा कि इसका विरोध करने या नई रणनीति बनाने की जरूरत है।सीएपीएफ के अध्यक्ष और सीआरपीएफ से एडीजी रिटायर्ड एच आर सिंह, जो सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी की अगुवाई करता है, ने कहा कि अभी बिल पर बहस होनी चाहिए।

बिल में संशोधन हो सकता है

इसमें कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं। इस बिल का भी पूरा विपक्ष है। हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार सीएपीएफ को गलत नहीं ठहराएगी। साथ ही, सरकार हमारी मांगों को पूरा करेगी। हम सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं। सरकार ने सिर्फ बिल प्रस्तुत किया, एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रणबीर सिंह ने कहा। यह सिर्फ आना था। अब हमारी कोर कमिटी की मीटिंग 28 मार्च को होनी है। इससे आगे क्या किया जाएगा निर्धारित होगा।

मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा

उनका कहना था कि यह बहुत गंभीर है कि सीएपीएफ के जवानों ने बॉर्डर से लेकर देश की अंदरूनी कानून-व्यवस्था को बचाने के साथ-साथ आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ अभियानों में भी भाग लिया। लेकिन सरकार सिर्फ हमारे बारे में नहीं सोचती। उनका कहना था कि सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों को समय से प्रमोशन मिलने, आईपीएस को प्राथमिकता देने और ओल्ड पेंशन कार्यक्रम को लागू करने की उनकी मांग है। इन्हें समाप्त करने तक लड़ाई जारी रहेगी।

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