Chandrika Bishnoi की दसवीं बैठक का परिणाम: जालोर की चंद्रिका विश्नोई ने दसवीं बोर्ड परीक्षा में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मिसाल दी है। SOG ने चंद्रिका के पिता गोपाल सारण को पेपर लीक मामले में गिरफ्तार कर लिया था। पिता की बदनामी के बावजूद होनहार चंद्रिका ने पढ़ाई को अपना हथियार बनाया। आगे पढ़ें चंद्रिका के संघर्षों की पूरी कहानी, पिता को जेल में डालने के बाद से।
जालोर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दसवीं वर्ष के परिणामों ने इस बार एक ऐसी सफलता की कहानी लिखी है जो समाज के लिए एक बहुमूल्य सबक है। जालोर जिले के चितलवाना उपखंड की एक बेटी ने दिखाया कि अपनी मेहनत से वह अपना भविष्य खुद लिख सकती है, भले ही उसे विरासत में ‘बदनामी’ मिली हो। यह चंद्रिका विश्नोई की कहानी है, जिसनेबोर्ड परीक्षा में 99 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे राज्य को चौंका दिया है।

पिता पर लगा था कि’पेपर लीक’ का साया
चंद्रिका की यह सफलता अद्वितीय है क्योंकि उसके पिता गोपाल सारण वर्तमान में जेल में हैं। गोपाल सारण, जो राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर थे, उन पर पेपर लीक माफिया भूपेंद्र सारण के साथ मिलकर भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने का आरोप लगाया गया है। 2024 में, SOG ने उन्हें विद्यार्थियों को पेपर पढ़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया। इससे पहले, 2020 में पाली जिले में उन पर ‘क्रूड ऑयल चोरी’ का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
काला अतीत और उज्ज्वल भविष्य
चंद्रिका ने घर की बंद चारदीवारी में अपनी किताबों को अपना जीवन बनाया, जबकि पिता ने परिवार को बदनाम कर दिया था। सिवाड़ा के सनराइज पब्लिक स्कूल की इस छात्रा ने न केवल अपनी पढ़ाई में सफलता हासिल की, बल्कि एक अच्छी वक्ता और कवयित्री भी है। चंद्रिका ने भी एक ऑनलाइन उपलब्ध कविता संग्रह, “छू ले नभ वो अब” लिखा है।
दादा की प्रेरणा और वैज्ञानिक बनने की इच्छा
चंद्रिका की पोती की सफलता पर उनके दादा पाबूराम विश्नोई भावुक हैं। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे (भूपेंद्र और गोपाल) भी बहुत प्रतिभाशाली थे, लेकिन गलत संगत ने उन्हें भटका दिया और परिवार पर दाग लगा दिया।” मैंने निर्णय लिया था कि मैं पोती को ऐसा नहीं होने दूंगा। आज उसने हमारा सिर फख्र से ऊंचा किया है, क्योंकि उसने हमें सही मार्गदर्शन दिया है।’
चंद्रिका वैज्ञानिक बनना चाहती है
अब चंद्रिका वैज्ञानिक बनने चाह रखती हैं। स्कूल के प्रिंसिपल रामनिवास मूढ़ ने कहा कि चंद्रिका की प्रतिभा असाधारण है और उसने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद धैर्य दिखाया। समाचार सिर्फ एक छात्रा के आंकड़े नहीं हैं; यह एक बेटी की प्रतिज्ञा है जिसने अपने पिता की पीड़ा पर अपनी मेहनत का मरहम लगाया है। जालोर के छोटे से गांव ‘परावा’ से निकली यह कहावत आज पूरे राजस्थान में सुनाई दे रही है: “अपराध पिता का हो सकता है, लेकिन भविष्य बेटी का है।”‘
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