Agra समाचार: आगरा में एक जीवित व्यक्ति को मृत दिखाने के मामले में छह पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। कोर्ट ने व्यक्ति की मृत्यु का साक्ष्य दिया।
Agra: आगरा, उत्तर प्रदेश में एक जमीन विवाद में खुद को मृत घोषित बताने का मामला का पता चला है। जमीन की बहस में कुर्की से खुद कि बचाव के लिए खुद को मृत दिखाया। नई आगरा थाने में 13 वर्ष पुराने मामले में पूर्व थाना प्रभारी, मुंशी सहित छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। दरअसल, आरोपी को स्कूटर चलाते समय दूसरे पक्ष ने चित्र खींचा था। इस चित्र को न्यायालय में पेश किया गया था। आरोपी ने 13 साल पहले आत्महत्या कर दी थी। अब कोर्ट ने पुलिस को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया है। मामले की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है।

1999 में केस दर्ज किया गया था
आगरा जिले के सिकंदरा के औद्योगिक क्षेत्र में रूबी टावर में मामला दर्ज किया गया था। रूबी टावर निवासी राजकुमार वर्मा ने कहा कि 21 अप्रैल 1999 को उनके पिता मदन गोपाल ने गांधीनगर निवासी विद्या देवी, ताराचंद और अन्य पर मुकदमा दर्ज कराया है। 2011 में, कोर्ट ने ताराचंद को गैर-जमानती वारंट और फिर कुर्की की कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके बाद ताराचंद ने अपने बेटे गिरीश चंद, नगला पदी निवासी घनश्याम दास, जिसे राजू टंडन कहते थे, और राजकुमार वर्मा, जिसे टीटू कहते थे, के साथ मिलकर एक चाल चलायी।
आरोपियों ने नई आगरा थाने के पूर्व प्रभारी और थाने के मुंशी से साठगांठ की थी। इसके बाद कोर्ट में खुद की मृत्यु की रिपोर्ट फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ दी गई। पिछले वर्ष 5 नवंबर को वादी राजकुमार वर्मा गांधीनगर गए थे। वहाँ ताराचंद स्कूटी पर घूमता हुआ दिखाई दिया। राजकुमार वर्मा ने ताराचंद की तस्वीरें खींचीं। उनकी मांग कोर्ट में पेश की गई।
2026 में एक स्कूटी खरीदी गई
2016 में, ताराचंद ने अपने नाम से स्कूटी खरीदी थी। कोर्ट ने नई आगरा थाना से जांच कर रिपोर्ट देने की मांग की। 13 जनवरी को थाना न्यू आगरा के प्रभारी ने ताराचंद की मृत्यु की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। इसके बाद न्यायालय ने नई आगरा थाना को कार्रवाई करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर नई आगरा थाना में एफआईआर दर्ज की गई। छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
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