Gajidabad: हरीश राणा को अंतिम विदाई देने वाले परिवार में हर कोई रो पड़ा, जबकि पिता की चुप्पी और मां की सिसकियों ने हर किसी को भावुक कर दिया।

Ghaziabad Harish Rana की अंत्येष्टि के बारे में सूचना: हरीश राणा के अंतिम संस्कार के बाद गाजियाबाद में बहुत शोक था। हर कोई भावुक हो गया जब मां की सिसकियां सुनाई दीं और पिता खामोश रहे।

गाजियाबाद: राज एम्पायर सोसायटी, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में बुधवार को बहुत दुखी और भावुक थी। दिल्ली के ग्रीन पार्क में हरीश राणा का अंतिम संस्कार करने के बाद सुबह करीब साढ़े 11 बजे परिवार घर लौटा, तो पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ दिखाई दिया। परिवार को सांत्वना देने के लिए सोसायटी के सदस्य, पड़ोसी और रिश्तेदार सुबह से ही इंतजार कर रहे थे।

जब परिवार घर पहुंचा, हर जगह दुःख था। सोसायटी में एक गहरी शांति छा गई और हर चेहरे पर दुख का प्रतीक था।

पिता का चुप रहना और माँ का रोना ने सब्र को तोड़ा

अशोक राणा के घर के बाहर राज एम्पायर सोसायटी की तीसरी मंजिल पर लोगों की भीड़ लगी रही। कोई चुपचाप खड़ा था, और दूसरा परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा था। आसपास खड़े लोगों की आंखें नम हो गईं जब मां निर्मला देवी की सिसकियां सुनाई दीं।

वहीं पिता अशोक राणा की चुपता और उनके दर्द भरे चेहरे ने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। हर कोई हरीश की यादों, माता-पिता का समर्पण और 13 साल के संघर्ष की कहानी सुनता था।

अंतिम संस्कार के दौरान जनसभा

दिल्ली के ग्रीन पार्क में हरीश का अंतिम संस्कार हुआ, जिसमें राजनगर एक्सटेंशन और आसपास के लोगों से काफी लोग पहुंचे, खासकर महिलाएं, जो नम आंखों से हरीश को अंतिम विदाई देने आईं. ब्रह्मकुमारी आश्रम की बहनों ने भी मौजूद रहकर आध्यात्मिक श्रद्धांजलि दी।

वीडियो में पिता की बेबसी का प्रसारण दर्द बढ़ा

पूरे घटनाक्रम को और अधिक दर्दनाक बनाने के लिए एक भावुक वीडियो भी सामने आया। पिता अशोक राणा अपने अंतिम संस्कार से पहले वीडियो में बोलते हुए अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पा रहे थे। उनकी आवाज में दर्द स्पष्ट था। ‘सभी उसे चाहते थे, आज मैं बोलने की स्थिति में नहीं हूं,’ उन्होंने कहा।जब यह वीडियो सभी के सामने आया, हर कोई रो पड़ा।

मुश्किल समय में समाज का साथ मिल गया

परिवार के घर लौटने के बाद समाज ने मानवीय भावना की मिसाल दी। कुछ लोगों ने परिवार और रिश्तेदारों के लिए खाना बनाया। पूरा समाज इस मुश्किल समय में एकजुट था।

तेजस चतुर्वेदी, दीपांशु मित्तल और मांगे राम त्यागी ने भी इस दौरान परिवार के साथ रहकर हर संभव मदद की।

जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी का प्रश्न उठाया

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठ गया। लंबे संघर्ष और देश भर में चर्चा के बावजूद, जिले से कोई जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी अंतिम संस्कार में नहीं था। किंतु कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की उपस्थिति ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया।

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