प्रधानमंत्री मोदी ने पैर छुआ माता की ,एक हजार अनुयायियों के साथ ट्रेन से अयोध्या पहुंच आ रहा हैं, पढ़िए कौन हैं माता अमृतानंदमयी

क्या Mata Amritanandamayi है? माता अमृतानंदमयी, एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक कार्यकर्ता, को उनके अनुयायी अम्मा कहते हैं।

अयोध्या: 19 मार्च को यूपी के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना होगी। राष्ट्पति द्रौपदी मुर्मु इस मौके पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि होंगी। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से लगभग 300 संत और विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में भाग लेंगे। केरल की माता अमृतानंदमयी एक हजार अनुयायियों के साथ ट्रेन से अयोध्या जाएंगी।

यह कार्यक्रम हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक चैत्र नवरात्र के पहले दिन, यानी वर्ष प्रतिपदा पर हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक योजना बनाई है जो इस कार्यक्रम को बेहद सुंदर बनाएगी।

अम्मा नामक नाम से पुकारते हैं अनुयायी लोग

भारतीय आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी बहुत प्रसिद्ध हैं। उसने संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी संबोधित किया है। इन्हें उनके अनुयायी अम् मा और अमाची भी कहते हैं। वर्ग, जाति और धर्म से ऊपर उठकर सबके लिए उपलब् ध रहने वाली माता अमृतानंदमयी की गले लगाने की आदत के कारण उन्हें हगिंग संत भी कहा जाता है। कान फिल्म फेस्टिवल में उनके जीवन पर एक फिल्म भी दिखाई गई है।

गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी

1953 में माता अमृतानंदमयी का जन्म केरल में हुआ था और उनका परिवार बहुत गरीब था। उन्हें पारिवारिक सुविधाओं की कमी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उनका परिवार मछली बिक्री करता था। उनका माता का नाम है अमृतानंदमयी मिशन ट्रस्ट, जो पूरी दुनिया में धार्मिक काम करता है।

सेवाभाव के भावना के कारण अभी तक विवाह नहीं किया

माता अमृतानंदमयी ने गरीबों, असहायों और लाचारों की सेवा करते हुए विवाह नहीं किया। उनके माता-पिता ने बहुत मेहनत की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। माता अमृतानंदमयी का बचपन से ही सेवा भाव था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने एक बार अपने गांव में गरीब लोगों को गायों और बकरियों का बचा हुआ खाना खाते देखा था। इसने उनके मन पर गहरा असर डाला। इसलिए उन्होंने जीवन भर लोगों की मदद करने का निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में फरीदाबाद में माता अमृतानंदमयी मठ के अस्पताल का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर, वे अम्मा के पैर छूकर आशीर्वाद दिए। अम्मा को उनके मठ की ओर से किए गए सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है, जैसे स्कूल खुलवाना, अस्पताल बनाना आदि। वह अपने अनुयायियों को प्यार करती है।

तीन हजार लोग आश्रम में रहते हैं

अम्मा का बचपन का नाम था सुधामणि। 5 साल की उम्र से वे खेती में समय बिताना शुरू कर देते थे। वह विश्व धर्म संसद में दो बार और संयुक् त राष्ट्रसंघ में कई बार भाषण दे चुकी है। अम्मा के आश्रम में तीन हजार लोग रहते हैं।

लाखों विदेशी अनुयायी भी

माता अमृतानंदमयी के लाखों अनुयायी हैं, न सिर्फ देश में बल्कि विदेश में भी। वह अक्सर अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया, कनाडा, अफ्रीका और यूरोपीय देशों का दौरा करती है।

श्रीराम यंत्र विजेंद्र सरस्वती महाराज ने भेजा था

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने दो वर्ष पहले श्रीराम यंत्र को शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा था। यह यंत्र वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित है, और यह सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने की क्षमता रखता है। वर्तमान में, राजा राम इस यंत्र की नियमित पूजा कर रहे हैं। 19 मार्च तक श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर यह मशीन पहुंच जाएगी।

7 हजार लोग समारोह में भाग लेंगे

दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या से आचार्यों ने नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान शुरू कर दिए हैं। इस ऐतिहासिक समारोह में लगभग 7000 लोग उपस्थित होंगे। इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ऐसे शिक्षित लोग भी शामिल होंगे, जिन्होंने निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मंदिर बनाने में सहयोग करने वालों को भी निमंत्रण

मंदिर निर्माण में मदद करने वाले संभ्रांत लोगों को भी विशेष निमंत्रण भेजे गए हैं। एलएंडटी, टाटा कंपनी का प्रतिनिधि, गुजरात के आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई का परिवार और परिसर की विकास में योगदान देने वाले अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, पत्थर-लकड़ी-संगमरमर की नक्काशी करने वाले, स्तंभों पर मूर्तियां उकेरने वाले, भगवान की प्रतिमा बनाने वाले और कपड़े बनाने वाले फर्मों के लगभग 1800 कार्यकर्ता भी आमंत्रित हैं।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *