मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस में बहुत से आरोप लगाया गया हैं।
नई दिल्ली: विपक्ष अब मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहा है, जो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने की मांग से बढ़ गया है। सोमवार को विपक्ष के एक नेता ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस में नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर राहुल गांधी पर उनके सार्वजनिक हमले और हाल के चुनावों में वोटों में कथित हेरफेर के मामलों का उल्लेख किया गया है।

प्रस्तावों को दोनों सदनों में पेश करने की आवश्यकता
ज्ञानेश कुमार को सीईसी पद से हटाने का प्रस्ताव लाने की मांग शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई। विपक्षी सांसदों ने मतदाता सूची में कथित हेरफेर पर चिंता व्यक्त की है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर नाराजगी व्यक्त की है।
राहुल गांधी के असहमति नोट का क्या अर्थ था?
विपक्षी नेता का कहना है कि लगभग 10 पृष्ठों के नोट में राहुल गांधी ने फरवरी, 2025 में बतौर नेता प्रतिपक्ष एक असहमति नोट का जिक्र है। ज्ञानेश कुमार को इस पद पर चुने जाने के खिलाफ यह असहमति नोट भेजा गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सीईसी की नियुक्ति करने वाली समिति में शामिल हैं. लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी भी इस समिति में शामिल हैं।
राहुल गांधी ने असहमति नोट में क्या कहा?
राहुल गांधी के द्वारा एक असहमतिपूर्ण नोट में कहा, ‘‘नए सीईसी का चयन करने के समय आधी रात को निर्णय लेना प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनो के लिए शर्म कि बात हैं, जब समिति की संरचना और प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है और 48 घंटे से भी कम समय में सुनवाई की जायेगी।”’
राहुल गांधी को सार्वजनिक अल्टीमेटम का उल्लेख
नोटिस में सीईसी द्वारा अगस्त 2025 में एक संवाददाता सम्मेलन में गांधी को दिए गए सार्वजनिक अल्टीमेटम का भी उल्लेख है। कुमार ने प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच नेता प्रतिपक्ष से या तो माफी मांगने या अपने दावों के समर्थन में हस्ताक्षरित हलफनामा देने को कहा।
मतदाता सूची हेरफेर के आरोपों का उल्लेख।
नोटिस में विपक्षी दल ने कर्नाटक के अलंद और महादेवपुरा में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों का भी जिक्र है। नोटिस पर राज्यसभा के लगभग 60 और लोकसभा के लगभग 130 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों के अनुसार, नोटिस में कुमार पर सात आरोप लगाए गए हैं, जिनमें ‘‘पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण आचरण’’, ‘चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना’ और बड़े पैमाने पर लोगों को ‘मताधिकार से वंचित करना’ शामिल हैं।
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