भारत में हॉर्मुज संकट से LPG की सप्लाई बाधित होने पर कमर्शल गैस की कमी और कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे होटल-रेस्तरां क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। भारत की LPG की आवश्यकता का बहुत बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, इसलिए इसमें जोखिम बढ़ा है।
तुषार जी: होटलों में रसोई गैस की कमी होने लगी है। इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट असोसिएशन (AHAR) ने कहा कि मुंबई में लगभग 20% होटल रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं क्योंकि कमर्शल LPG सिलिंडर की नियमित सप्लाई नहीं होती है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर यही हाल रहा तो प्रतिष्ठानों की आधी संख्या गिर सकती है। समाचारों के अनुसार, दिल्ली-NCR में कमर्शल सिलिंडर ब्लैक मार्केट में 1500 रुपये तक की कीमतों पर उपलब्ध हैं।

होर्मुज बंद: इस संकट की मूल वजह तक मिल रही है। यह निश्चित रूप से अमेरिका-इस्राइल का ईरान के खिलाफ हुआ युद्ध है, जो अब पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया है। इससे तेल-गैस के टैकर होर्मुज स्ट्रेट से पास नहीं हो सकते। इसी रास्ते से 85 से 90% LPG भारत आता है। सप्लाई बाधित होने से लागत बढ़ रही है। घरेलू गैस की कीमत सिर्फ पिछले हफ्ते 60 रुपये बढ़ गई है। स्थिति गंभीर होती जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान होने लगा है।
वास्तविक समस्या दूसरी है। आयात भारत की 62% घरेलू LPG की मांग को पूरा करता है। ऐसे में मुझे कोई संदेह नहीं था कि संकट आएगा; सवाल था कि कब आएगा। होटल-रेस्तरां के सामने आई समस्या, हालांकि, असली समस्या का बहुत छोटा हिस्सा है। 32.99 करोड़ घरों को देश भर में प्रधानमंत्री उज्वला योजना (PMUY) से LPG मिल गया है। 10.33 करोड़ सब्सिडी कनेक्शन भी इसमें हैं। है इसके बावजूद सभी को घरेलू गैस उपलब्ध कराना मुश्किल है।
विपत्ति से सीख
जियो-पॉलिटिक्स एथेनॉल पर असर नहीं करेगा
देश के आयात बिल में कमी, स्थिरता
बायोमास के मुकाबले पर्यावरणीय लाभ
Biomass पर निर्भरता। भारत की लगभग ४० प्रतिशत आबादी आज भी बायोमास इंधन, जैसे लकड़ी और गोबर का इस्तेमाल करती है। वायु प्रदूषण की वजह से हर साल लगभग 12 लाख लोगों की अकाल मौत होती है, ऐसा अनुमान है। जिन घरों में LPG कनेक्शन है, वे बायोमास पर ही निर्भर हैं, यहां तक कि वे कम आय वाले हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक समस्याएं हैं।
सब्सिडी पर व्यय। सरकार ने PMUY के तहत 2025 से 26 तक 12 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर गरीब लोगों को LPG का उपयोग करने की अनुमति दी है। IOCL, BPCL और HPCL को घरेलू गैस बिक्री में हुए घाटे की भरपाई के लिए 30 हजार करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा। यह आयातित गैस पर निर्भर करने वाली व्यवस्था का खर्च है।
क्षमता का विकास। भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 1822 करोड़ लीटर हो गई है, जबकि देश LPG सप्लाई को जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। सालाना पेट्रोल में 1016 करोड़ लीटर एथेनॉल मिलाना चाहिए। इसके बाद भी बहुत अधिक बच जाता है। 250 करोड़ लीटर घरेलू ईंधन का इस्तेमाल करने से दो करोड़ घर चल सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध। निर्माण मौजूद है। ध्यान देने वाली बात है कि देश में एथेनॉल डिस्टिलरी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही हैं। साथ ही, बड़े पैमाने पर और सस्ता एथेनॉल (90–95% शुद्धता) खाना पकाने के लिए पर्याप्त है। यह भी अच्छी बात है कि भारत में पहले से ही एथेनॉल बनाने, स्टोर करने और भेजने का बुनियादी ढांचा है। एथेनॉल, बायोमास से अधिक प्रदूषित नहीं होता। घरेलू गैस भारत में हर साल 35 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करती है, जैसा कि Centre for Science and Environment का अनुमान है। ट्रैफिक से अधिक एथेनॉल इसमें मदद करता है।
प्रभावी उपयोग। भारत में लगभग ४५ लाख सड़क खाद्य विक्रेता हैं। एथेनॉल इसमें शामिल हो सकता है। 13 लाख वेंडर भी ऐसा करते हैं तो 30 से 40 लाख टन CO उत्सर्जन कम किया जा सकता है। देश में एथेनॉल बनाने की प्रौद्योगिकी है और इसे लागू किया गया है। एथेनॉल से चलने वाला कुकस्टोव HPCL और IIT गुवाहाटी ने बनाया है। HPCL के पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल एटीएम लगाए जाएंगे। पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में एथेनॉल का पायलट प्रोजेक्ट सफल हुआ है।
उत्तम विकल्प। भारत में एथेनॉल उत्पादन और संबंधित प्रणाली काफी मजबूत हो चुका है, लेकिन नीतियों के स्तर पर सुधार की जरूरत है। सरकार को भी PMUY के तहत एथेनॉल लाना चाहिए और राज्यों में पायलट परियोजनाएं शुरू करनी चाहिए। आज आयात से भारत की लगभग 62% आवश्यकता पूरी होती है। इसलिए देश को जियो-पॉलिटिकल संकटों से अधिक प्रभावित होने का खतरा है। एथेनॉल एक दूसरा विकल्प हो सकता है।
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